प्रदूषित नहरों को फिर से साफ करने का अभियान बूढ़े नाले को फिरसे दरिया बनाने से की जाएगी शुरूआत
श्रीमान संत अवतार सिंह जी की 35वीं बरसी श्रद्धा के साथ मनाई गई
सुल्तानपुर लोधी ( डा.सुनील धीर)। क्षेत्र की संगत द्वारा निर्मल कुटिया सीचेवाल में श्रीमान संत अवतार सिंह जी की 35वीं बरसी श्रद्धा भाव से मनाई गई। जयंती के मौके पर पहुंचे पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवा ने पुष्पांजलि अर्पित कर कहा कि पंजाब के अस्तित्व को बचाने के लिए नदी और भूमिगत जल को बचाना समय की मुख्य जरूरत बन गई है।
उन्होंने राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा पंजाब के पर्यावरण को बचाने के लिए पिछले 25 वर्षों से लगातार किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे लगातार पंजाबियों को अवगत करा रहे हैं कि भूमिगत जल तेज़ी नीचे जा रहा है और सूख रहा है। उन्होंने सप्षट कहा कि पंजाब का अस्तित्व पानी से ही है। उन्होंने केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि 2039 तक पानी धरती के नीचे 1000 फुट तक गहरा चला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अगर पानी नहीं होगा तो पंजाब की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। स्पीकर संधवा ने लुधियाना में बुढे नाले का जिक्र करते हुए कहा कि कभी यहां सतलुज नदी की धारा बहती थी। लेकिन मुनाफे की होड़ के चलते यह प्रदूषित हो गई और किसी सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने पंजाब के लोगों से पानी के प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल के नेतृत्व में पंजाब सरकार पंजाब की प्रदूषित नदियों को स्वच्छ बनाने का अभियान बूढ़े नाले को फिर से दरिया बनाकर शुरू करेगी। कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि संत सीचेवाल, जिन्हें गुरु नानक देव जी की चरण स्पर्श मर चुकी काली बेईं, को संगत के सहयोग से पुनर्जीवित कर दुनिया भर में एक मिसाल कायम की हैं।
इस अवसर पर संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कार्यक्रम में आए संतों एवं वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संत अवतार सिंह जी ने क्षेत्र में गुरबानी का संदेश फैलाकर क्रांतिकारी कार्य किया। उन्होंने कहा कि जब संत अवतार सिंह जी ने कुटिया की कमान संभाली थी उस दौरान दोना क्षेत्र के सीचेवाल गांव को कोई विरला ही जानता था। संत सीचेवाल ने कहा कि संत अवतार सिंह ने ही दोआबे क्षेत्र में गुरबाणी और पर्यावरण जागरूकता का बीजारोपण किया था, जिसकी आवाज आज पूरे विश्व में पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि वे संत अवतार सिंह जी द्वारा दिखाए गए समाज सेवा के कार्यों को पूरा करने के लिए गुरबाणी की आशय के अनुरूप उनपर चल रहे हैं।




