चंडीगढ़, 14 फरवरी | दिल्ली विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब पंजाब सरकार एक्शन में आ गई है। सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्ययोजना तैयार की है।
सरकार ने जिलों के डीसी, एसडीएम, एसएसपी और थानेदारों को भी अपने क्षेत्र में भ्रष्टाचार रोकने का आदेश दिया है। अगर वे इसमें सफल नहीं हुए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। इसका मूल्यांकन आम जनता और विधायकों से मिले फीडबैक के आधार पर किया जाएगा।
इससे पहले जनवरी महीने में सरकार ने रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में लगे कैमरों को सक्रिय करने का आदेश दिया था। कैमरे ठीक कराने के लिए 7 दिन का समय भी दिया गया। आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर कैमरे काम नहीं करते पाए गए तो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले सरकारी जांच के दौरान पूरे प्रदेश में सिर्फ तीन कैमरे ही काम करते पाए गए थे।
पंजाब सरकार शुरू से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रिय रही है। सरकार ने अपने इशारे पर अपने विधायकों के खिलाफ मामले दर्ज किया था। इसके अलावा कांग्रेस सरकार के कई पूर्व मंत्रियों पर भी भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं। सरकार ने इस मामले को बड़े पैमाने पर भुनाया था लेकिन ये मामले अदालत में नहीं चल सके।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु और सुंदर शाम अरोड़ा के खिलाफ दायर भ्रष्टाचार के मामले को खारिज कर दिया है। ऐसे में सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष सरकार को घेर रहा है। ऐसे में सरकार किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।



