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पंजाब सरकार ने शहीदों के नाम पर झूठे वादे कर नौजवानों को किया गुमराह : मुहम्मद इस्माईल

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मालेरकोटला , 3 अक्टूबर ।  कस्बा बेला में पत्रकारों को जानकारी देते हुए सतनाम सिंह एडवोकेट ने बताया कि पिछले वर्ष पंजाब के मुख्यमंत्री ने शहीद भगत सिंह की जयंती के अवसर पर शहीद ए आजम स. भगत सिंह राज युवा पुरस्कार को फिर से शुरू करने की औपचारिक घोषणा की गई, इस संबंध में राज्य भर में बड़े-बड़े फ्लेक्स बोर्ड लगाकर खूब प्रचार-प्रसार भी किया गया।

शहीद भगत सिंह राज युवा पुरस्कार 2021-22 देने हेतु समाचार पत्रों के माध्यम से विज्ञापन जारी किये गये तथा पात्र अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किये गये। सरकार की घोषणा के अनुसार प्रत्येक जिले में 2 युवाओं को राज्य स्तरीय पुरस्कार दिया जाना था और पूरे पंजाब में 46 युवाओं को राज्य स्तरीय पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी, जिसमें विजेता को एक मेडल, स्क्रॉल, प्रमाण पत्र और 51,000 की सनमान राशि भी दी जाएगी।

विभाग ने प्रत्येक जिले से पांच फाइलें मंगवाईं जिन्हें जिलों के उपायुक्तों की अध्यक्षता में गठित समितियों द्वारा अंतिम रूप दिया गया और युवा सेवाएं कार्यालय पंजाब को भेज दिया गया। इसके बाद राज्य स्तर पर फिर से एक नई समिति का गठन किया गया, जिसने 29 पात्र उम्मीदवारों की सूची तैयार की और विभाग ने उन 29 उम्मीदवारों को पुरस्कार देने के लिए पुलिस सत्यापन भी किया।

लेकिन इस अवसर पर युवा सेवाएं विभाग ने गुपचुप तरीके से केवल छह अभ्यर्थियों को ही राज्य स्तरीय सम्मान देने का निर्णय लिया और 23 मार्च 2023 को हुसैनीवाला की पवित्र भूमि पर गुपचुप तरीके से केवल छह अभ्यर्थियों को ही राज्य स्तरीय सम्मान दिया गया। गौरतलब है कि सरकार ने 23 मेधावी अभ्यर्थियों को बिना वजह नजरअंदाज कर दिया।

इसके बाद मेधावी अभ्यर्थियों ने अपनी समस्या को लेकर पंजाब सरकार, युवा सेवाएं विभाग और राज्यपाल को भी गुहार लगाई, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया।

विभाग के सचिव और निदेशक को नोटिस जारी कर 05.12.2023 तक अपना जवाब देने को कहा है। इस बारे में जानकारी देते हुए मुहम्मद इस्माइल ने कहा कि इसके अलावा युवा सेवाएं विभाग द्वारा और भी कई कमियां की गई हैं और हैरानी की बात यह है कि अब विभाग अपनी गलतियों को छुपाने की कोशिश की हद तक आ गया है कि सूचना के अधिकार के तहत अधिनियम 2005 भी कोई जानकारी नहीं दे रहा है।

बता दें कि जल्द ही मेधावी उम्मीदवार पंजाब स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई आरोपियों के चेहरे बेनकाब करेंगे। पंजाब सरकार ने शहीदों के नाम पर ऐसे झूठे नारे लगाकर जहां युवाओं को धोखा दिया है, वहीं इसे शहीदों के अपमान के तौर पर भी देखा जा सकता है।

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