बिखरा जीवन का ताश है ******* प्यासे नैनों में प्यास है, जिंदा दिल में ये आस है। राजा , बेगम , जोकर नहीं, बिखरा जीवन का ताश है। फीका फीका सा रंग है, आया जीवन का नाश है। नीला नीला सा आसमां सूखी धरती का खास है। महका महका है बागवां, फूलों का साया पास है। मीठा मीठा अनुराग सा, ख्वाबी मन का ये दास है। मनसीरत कुछ भाता नहीं, कैसा तन मन में वास है। ******* सुखविंद्र सिंह मनसीरत खेड़ी राओ वाली (कैथल)



