नई दिल्ली। ‘एक चुप, सौ सुख’ या ‘एक चुप, सौ को हराए’। ये बोलचाल की कहावतें हैं जो रिश्तों को बिगड़ने से बचाती हैं। लेकिन जब पार्टनर चुप्पी साध ले तो ये बिगड़ते रिश्ते की ओर इशारा करता है। ये चुप्पी सुख से ज्यादा दुख देने वाली होती है। इसे ‘साइलेंट ट्रीटमेंट’ कहा जाता है, जिसमें आप सामने वाले को इग्नोर करते हैं और उसे यह महसूस करवाते हैं कि उसकी आपकी जिंदगी में कोई वैल्यू नहीं है।
अक्सर साइलेंट ट्रीटमेंट का इस्तेमाल अपनी बात मनवाने, किसी पर हावी होने, नाराजगी जताने, रिश्ते में खड़ी हो रही समस्याओं को नजरअंदाज करने के लिए और रिश्ते से कटने के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। रिश्ता जब असहनीय होने लगे तो यही साइलेंट ट्रीटमेंट होता है। इसमें ‘स्टोनवॉलिंग’ यानी अपने चारों तरफ चुप्पी दीवार खड़ी कर लेना, ‘कोल्डशोल्डर’ यानी किसी के प्रति ठंडा रवैया अपनाना आता है।
ये सभी रिश्ते के बहिष्कार के अलग-अलग रूप हैं। ये रिश्ता पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल भी हो सकता है। मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की साइकोलॉजिस्ट डॉ सौम्या निगम कहती हैं ऐसे लोग रिश्ते में कभी झुकते नहीं हैं। वे अपने अलावा दूसरे को सही मानते। उनकी बात काट दी जाए तो उनके अहम को चोट लगती है। रिश्ते में उनका अहम आड़े आता है जो उन्हें बार-बार चुप कराता है। इसमें साइलेंट ट्रीटमेंट देने वाले को अपनी जीत नजर आती है और पार्टनर को तकलीफ होती है।



