तवाफ एवं नमाज़ की तरह एतकाफ भी अल्लाह के निकटका का विशेष साधन है
नई दिल्ली/ जद्दा । रमजान उल मबारक के बाबरकत ओैर पवित्र माह में अल्लाह पाक ने इंसान को बहुत सारी इबादात को अनुसरण करने का पाबंद बनाया,जैसा कि रोज़ा,तरावीह,कुरआन पाक की तिलावत ऐवं शब ए कदर की तलाश आदि। इसी प्रकार एक इबादत है एतकाफ। ये सुन्नत मोअक्किदा ( अलल किफायह) है। अर्थात अगर बस्ती या मोहल्ला में से एक वयक्ति भी एतकाफ में बैठ गया तो सब की ओर से अदा हो जायेगा। ओैर अगर कोई भी वयक्ति ऐतकाफ में नहीं बैठा तो पूरी बस्ती या मोहल्ला गुनहगार होगा। यह विचार पंजाब टाइमज़ न्यूज़ के साथ केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान दारुल उलूम कादरिया फरवाही के अध्यापक मौलाना मुहम्मद कासिम ईसा पुरी ने जद्दा से बात करते हुए वयक्त किये।
इस लिए अपने मोहल्ले की मस्जिद में एतकाफ में बैठने की कोशिश करेंगे। अगर किसी कारण खुद नहीं बैठ सकते तो किसी को बिठायें इस का सवाब आप को भी मिलेगा। इसी प्रकार अल्लाह ने कुरआन मजीद में एतकाफ का ज़िक्र फरमाया है। अल्लाह ने अपने खलील हज़रत इब्राहीम अलेैहिस्सलाम एवं हज़रत इसमाईल अलैहिस्सलाम को बैतुल्लाह के निर्माण के बाद तवाफ करने वालों, एतकाफ करने वालों एवं नमाज़ अदा करने वालों के लिए उसे (बैतुल्लाह) पाक साफ रखने का आदेश दिय़ा है।
अर्थात तवाफ एवं नमाज़ की तरह एतकाफ भी अल्लाह के निकटका का विशेष साधन है। रमज़ान उल मुबारक के अंतिम अशरे का एतकाफ करना प्यारे नबी की स्थाई सुन्नत है। प्यारे नबी पैगंबर हज़रत मुहम्मद (सल.) का यह पूरे महीना का एतकाफ शब ए कदर की तलाश के लिए था वरना अलस आदेश रमज़ान के अंतिम अशरे में एतकाफ करने का है।



