मुकेरियां हाइडल चैनल से साफ पानी कम होने से मछलियों के मरने का पैदा हो जाता था खतरा
सुल्तानपुर लोधी, 04 अप्रैल( डा.सुनील धीर) श्री गुरु नानक देव जी की चरना स्पर्श की गई पवित्र काली बेईं पर बैसाखी के उत्सव के मद्देनजर बेईं में मुकेरियां हाइडल चैनल से 350 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन ने जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव कृष्ण कुमार और पंजाब ऊर्जा विकास एजेंसी (पेड़ा) के मुख्य अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पवित्र बेईं में अप्रैल 2015, 2017 और 2021 की तरह 350 क्यूसेक पानी छोड़ना सुनिश्चित करें। गुरुद्वारा बेर साहिब के निकट पवित्र बेईं और बेईं के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में मछलियाँ मर गईं थी। जिसको लेकर मत्स्य विभाग, पंजाब जल सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड और पंजाब प्रदूषण बोर्ड की टीमों ने बेईं में गिरने वाले गंदे पानी के अलग-अलग स्थानों से सैंपल एकत्रित किए थे।
ये टीमें इस नतीजे पर पहुंचीं कि इन दिनों में मछलियों के अंडे देने में बढ़ोतरी होती है। गंदे पानी के कारण ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और मुकेरियां हाइडल चैनल सीवेज से साफ पानी कम कर दिया जाता है। जिससे इन मछलियों के मरने का खतरा हमेशा बना रहता था। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन ने पत्र में साफ कहा है कि इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाए और पहले से ही व्यवस्था की जाए।
संपर्क करने पर राज्यसभा सदस्य और पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि उन्होंने पिछले दिनों बेईं में पानी छोड़ने के निर्देश दिए थे ताकि मछलियों के मरने की घटना दोबारा न हो। उन्होंने कहा कि बैसाखी के अवसर पर श्री गुरु नानक देव जी के चरणों से स्पर्शित इस पवित्र काली बेईं के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर श्रद्धालु जहाँ इस बेईं में स्नान करते हैं वहीं वे इस बेईं के जल से चूल्हा भरते हैं। संत सीचेवाल ने कहा कि उन्होंने ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि बेईं में पानी छोड़ने के मामले में इस बात का ध्यान रखा जाए कि बेईं के किनारे भूस्खलन के कारण किसानों का किसी भी प्रकार का नुकसान न हो।



