रोपड़। शादी समारोह, जन्मदिन पार्टियों, वर्षगांठों, सम्मेलनों, सैमीनारों तथा इसी प्रकार के अन्य कई मौकों पर भव्य दावतें उड़ाई जाती हैं। इनकी समाप्ति के बाद सड़कों पर बचे हुए खाने के टीले दिखाई देते हैं। इस खाने की कीमत वही जानता है जो भूखा हो। आमतौर पर लोग अपनी प्लेट में ज्यादा से ज्यादा खाना डालने की कोशिश करते हैं। फिर चाहे वह खाना प्लेट से बाहर आता हो।
इसी तरह की खाने की बर्बादी उस समय होती है जब होटलों में समारोह समाप्त होते हैं। जब खाना मुफ्त का हो और नि:शुल्क हो तो लोग अपनी भूख से ज्यादा खाना अपनी प्लेटों में डाल लेते हैं। भारत में कुपोषण और भूख के कारण लाखों लोग प्रत्येक वर्ष मरते हैं। भुखमरी से होने वाली मौतें देश के अन्य हिस्सों में अब कोई नई बात नहीं। ग्लोबल हंगर इंडैक्स 2019 ने भारत को 117 देशों में 102 स्थान दिया है जो इस बात का संकेत है कि देश में भूख का स्तर कितना गम्भीर हो चुका है।
खाद्यान्न उत्पादन में भारत के स्वयं निर्भर होने के बाद अभी भी अनेकों लोग खाना न होने के कारण भूखे सोते हैं। ऐसे लोगों में महिलाओं और बच्चों की गिनती ज्यादा है। प्रत्येक वर्ष उत्पन्न होने वाला करीब एक-तिहाई खाना बर्बाद या फिर गायब हो जाता है। धनी लोग अभी भी उस खाने को कूड़ेदानों में फैंक देते हैं जो वे खा नहीं सकते। कहा जाता है कि 40 प्रतिशत फल तथा सब्जियां और 30 प्रतिशत दालें अपर्याप्त अयोग्य सप्लाई चेन प्रबंधन के चलते बर्बाद हो जाती हैं, जोकि मार्कीट में नहीं पहुंचतीं। जबकि खाद्यान्न का महत्वपूर्ण स्तर कटाई के दौरान या फिर कटाई के बाद हैंडलिंग के दौरान बर्बाद हो जाता है।
आबंटन तथा उपभोग के दौरान भी खाना बर्बाद हो जाता है। कुछ सार्वजनिक उत्साही लोग और एन.जी.ओ. फालतू बचे-खुचे खाने को एकत्र करते हैं और गरीबों में बांट देते हैं। हमारे समाज को भी इसके प्रति जागरूक होने की जरूरत है। ज्यादातर यह बात भी महत्ता रखती है कि लोगों को खाने की बर्बादी के बारे में शिक्षित किया जाए।
सामाजिक जागरूकता और बेहतर संगठित तरीके से हम इस समस्या का हल ढूंढ सकते हैं। सार्वजनिक समारोहों के दौरान खाने की बर्बादी के बारे में हमें लोगों को सूचना मुहैया करवाई जानी चाहिए और उन्हें अपील भी करनी चाहिए ताकि खाने की बर्बादी कम से कम हो सके।
एन.जी. ओज को भी आगे आकर बचे-खुचे खाने को इकठ्ठा करने के लिए अपने स्वयंसेवकों को फील्ड में लगाना चाहिए ताकि वही खाना भूखे और गरीब लोगों में बांट दिया जाए। रेस्तरां चलाने वालों को भी खाने की बर्बादी कम करने के लिए प्रोत्साहन राशि दी जानी चाहिए। इसके साथ-साथ सभी नगर निगमों का यह भी दायित्व बनता है कि ऐसा बर्बाद खाना फैंकने वालों पर जुर्माना लगाया जाए।



