चंडीगढ, 31 जनवरी| पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि अगर किसी कर्मचारी की नियुक्ति 2004 से पहले हुई है, भले ही वह उस तारीख के बाद नियमित हुआ हो, तो भी वह पुरानी पेंशन स्कीम का हकदार है. हाईकोर्ट ने पंजाब के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार करते हुए पंजाब सरकार को 4 महीने के भीतर उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ जारी करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए सुरजीत सिंह व अन्य ने वकील रंजीवन सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उन्हें पंजाब के विभिन्न विभागों, बोर्डों, निगमों आदि में कच्चे कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति 2004 से पहले हुई थी लेकिन नियमितीकरण 2004 के बाद हुआ।
याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्यों ने 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना अपनाई थी और याचिकाकर्ताओं को भी उसी योजना को अपनाने की शर्त पर नियमित किया गया था। नियमित होने के बाद याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का निर्देश जारी करने की अपील की थी. हाईकोर्ट ने जनवरी 2023 में याचिकाओं का निपटारा करते हुए पंजाब सरकार को इस मामले में फैसला लेने का आदेश दिया. इसके बाद सरकार की ओर से इस दावे को खारिज कर दिया गया.
पंजाब सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ताओं को नियमित करते समय नियम और शर्तें लागू होती हैं और इन शर्तों को पढ़ने और स्वीकार करने के बाद वे इनकार नहीं कर सकते। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि हरबंस लाल व अन्य के मामले में हाई कोर्ट ने पेंशन को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है. इस मामले में पंजाब सरकार की अपील सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो गई है.
ऐसे में जब किसी फैसले को पंजाब सरकार ने मंजूरी दे दी है तो उसका पालन हर हाल में किया जाना चाहिए. सरकार को कर्मचारियों को कोर्ट जाने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए. इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार करते हुए पंजाब सरकार को 4 महीने के भीतर सभी याचिकाकर्ताओं को पुरानी पेंशन का लाभ जारी करने का आदेश दिया।



