*क्यों प्रेम तराने गाता हूं* ******** क्यों प्रेम तराने गाता हूं। चल राह चला मैं आता हूं। जब नींद उड़े दिन रातों में, हर रोज उसे तड़पाता हूं। वो आन पड़े जब राहों में, तब देख उसे शरमाता हूं। जब वायु चली बन पुरवाई, यूं भाव उसी बह जाता हूं। नम बूंद पड़े भीगे आंचल, झट पास खड़ा हो जाता हूं। क्यूं आंख लड़ी है मनसीरत, आ पास जरा समझाता हूं। ******* सुखविंद्र सिंह मनसीरत खेड़ी राओ वाली (कैथल)



