Thursday, April 9, 2026
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काम निकला तो भुला रिश्ते दिए ऐसे लोगों के लिए फुर्सत नहीं

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कर्म खोटे कर तुझे अज़मत नहीं
जीस्त में मिलती कभी बरकत नहीं//

हो कभी इसके कभी उसके गए
हैं हमें ऐसी अज़ी आदत नहीं//

अश्क ही आँखों से बहते हैं सदा
प्यार में मिलती कभी लज़्जत नहीं//

जान रखते हैं हथेली पर सदा
दुश्मनों से है हमें दहशत नहीं//

काम निकला तो भुला रिश्ते दिए
ऐसे लोगों के लिए फुर्सत नहीं//

दूसरों के मशविरों पर ज़िंदा हो
क्या तुम्हारा अपना कोई मत नहीं//

क्यों नशे के वास्ते बेचैन हो
ये तुम्हें अच्छी लगी है लत नहीं//

मौलिक सृजन
ऋतु अग्रवाल
मेरठ

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