सावन की फुहार ••••••••••••••••••••••• आज धरा को सावन की बूंदों ने भिगो दिया। सोंधी मिट्टी की खुशबू से महकने लगे जिया। बड़ा यौवन-सा छाया है हरियाली पे आज। श्रृंगार कर दुल्हन आंखों में लिए लाज। माथे की बिंदिया को मिलन का इंतजार है। हाथों की चूड़ियां मेहंदी से करे तकरार है। ये सावन की फुहार मुझे भिगो रही है ऐसे। साजन के आने का संदेशा ला रही है जैसे। इन बूंदों ने आज तुझे भी सताया होगा। मेरा हाल ए दिल धीरे से सुनाया होगा। ये सावन के झूले बुला रहे हैं तुझे। तेरे बिना ये मेले अधूरे लग रहे हैं मुझे। कोयल की कू-कू पपीहा का शोर मुझे बहुत सताए। रिमझिम बरसे सावन तेरी यादो से भिगो जाए। हवाओं ने जाकर प्रेम का पैगाम दे दिया है। दरवाजे पर खड़े पिया ने मुझे बाहों में भर लिया है। एकता सिंह (दिल्ली



