सूक्ष्म जांच से पूर्व नान प्रबंधक समेत प्रशासनिक अधिकारियों के भ्रष्ट आचरण की कलई खुलने की संभावना
कटनी। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग कटनी में भ्रष्टाचार और घोटाले थमने का नाम नहीं ले रहे है।।यहाँ पदस्थ अधिकारियों को लोकायुक्त ने दबोचा लेकिन इसके बावजूद भी इस विभाग की करतूत में सुधार नजर नहीं आ रहा है।अभी 5करोड का चावल गबन का मामला उजागर हुआ लेकिन इस मामले की यदि सूक्ष्म जांच की जाये तो विभाग में पदस्थ पूर्व अधिकारियों की गर्दन नप जायेगी।।
फेयर फूड ओवरसीज द्वारा 5 करोड का चावल गबन कर लिए जाने के मामले में 2 साल से अंदर ही अंदर चल रहे इस मामले का खुलासा मंगलवार को हुआ जबकि नागरिक आपूर्ति निगम नान के जिला प्रबंधक अमित गौड़ ने कंपनी की 4.98 करोड़ की एफडी सीज करते हुए उसका निगम के पक्ष में भुगतान हेतु बैंक को पत्र भेजा है श्री गौड़ के मुताबिक कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की कार्रवाई भी की जा रही है कंपनी से ब्याज की राशि भी जमा कराई जाएगी।
बताया जाता है कि 2020-21 में फेयर फूड अलग-अलग जगहों से 4.98 करोड रुपए कीमत की 21650 क्विंटल धान 50लाट बिलिंग करने नान से हासिल की थी कंपनी द्वारा धान तो ले ली गई लेकिन मिलिंग करने के बाद चावल के भंडार ग्रहों में जमा नहीं कराया गया।। सूत्रों के अनुसार 2020-21 में यह बात विभाग के अफसरों को पता चल गई थी कि फेयरफूड द्वारा 5करोड की धान दबा ली गई है नान के अफसरों ने बजाएं कार्रवाई करने के उसे चावल जमा करने का अवसर देते रहे कंपनी के कर्ताधर्ता व संचालक अगले अगले महीने करके टालते रहे बात भोपाल तक पहुंची सोमवार को इस मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश मिलते ही कार्रवाई शुरू की गई।
इस गंभीर घोटालेबाजी की जांच में फेयर फूड को तो जांच के दायरे में ले लिया लेकिन उस समय पदस्थ नान प्रबंधक की जांच क्यों नहीं की जा रही है।
घोटाले में अधिकारियों की जांच में हो सकता है भ्रष्टाचार का खुलासा
इस मामले में तत्कालीन पीएस फैज अहमद किदवई,एमडी तरुण पिथौरे,महाप्रबंधक मिलिंग हिरदेश श्रीवास्तव,कलेक्टर प्रियंक मिश्र,ज़िला आपूर्ति अधिकारी बालेन्दु शुक्ल एवं ज़िला प्रबंधक संजय सिंग की भी भूमिका की भी जाँच होनी चाहिए।।सूत्रों की माने तो ये मामला उनके संज्ञान में था और संजय सिंग ने इस मामले को दबायें रखने के लिए कथित तौर पर उम्मीद से बडा भ्रष्टाचार किया गया कटनी के ही एक उभरते दलाल राइस मिलर्स की मध्यस्थता अधिकारी तक की गयी इसकी जांच हो तो सच्चाई तस्वीर की तरह सामने होगी और अधिकारी की करतूत उजागर होगी।
वही धान उठाव के एवज में सिक्योरिटी में जमा बैंक गारंटियों की वैधता समाप्त होने के पूर्व भी उनका भुगतान नहीं करवाया गया।



