मालेरकोटला,16 अगस्त। मशहूर आलिम-ए-दीन मुफ़्ती अब्दुल मलिक क़ासमी (सदर, जमीअत उलमा संगरूर पंजाब) की सरपरस्ती में मदरसा नूरुल उलूम मालेरकोटला में एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर 15 अगस्त की मुनासिबत से मदरसे के छात्र-छात्राओं ने शानदार प्रस्तुतियां पेश कीं। अपनी तकरीरों, नातों और मुक़ालमों के ज़रिए श्रोताओं का दिल जीत लिया। इस कार्यक्रम का संचालन क़ारी मोहम्मद आक़िब ने किया।
कार्यक्रम से सदारती खिताब करते हुए मुफ़्ती अब्दुल मलिक क़ासमी ने कहा कि 15 अगस्त हमारे लिए इस मायने में बेहद अहम है कि इसी तारीख़ को हमें अंग्रेज़ की ग़ुलामी से निज़ात मिली थी। यह यादगार लम्हा हमें अपने बुज़ुर्गों की कुर्बानियों के नतीजे में नसीब हुआ। आपने कहा कि जमीअत उलमा-ए-हिंद का क़ियाम 1919 ईस्वी में अमल में आया था और उस वक़्त का सबसे बड़ा तक़ाज़ा यही था कि मुल्क को अंग्रेज़ के पंजा-ए-इस्तिब्दाद से आज़ाद कराया जाए और मुल्क की बागडोर इसके असली बाशिंदों के हवाले की जाए। इसके लिए जमीअत उलमा-ए-हिंद और दारुल उलूम देवबंद के हमारे अकाबिर ने हर मोर्चे पर कुर्बानियां दीं, दार व रसन और कैद व बंद की तल्ख़ मंज़िलों से भी गुज़रे, लेकिन जमीअत उलमा-ए-हिंद के प्लेटफॉर्म से जो आवाज़ बुलंद की और जिस दिशा में क़दम बढ़ाए, ज़िंदगी की आख़िरी सांस तक उस पर पहाड़ बनकर जमे रहे।
मुफ़्ती अब्दुल मलिक क़ासमी ने वाज़ेह अल्फ़ाज़ में कहा कि महात्मा गांधी को *“महात्मा”* का ख़िताब देने वाले भी हमारे बुज़ुर्ग हैं और मुल्क की आज़ादी में बुनियादी किरदार अदा करने वाले भी हमारे जमीअत उलमा-ए-हिंद के बुज़ुर्ग हैं। जमीअत उलमा-ए-हिंद के ज़िक्र के बग़ैर हमारे मुल्क की आज़ादी की तारीख़ कभी मुकम्मल नहीं हो सकती।
क़ारी मोहम्मद आक़िब ने कहा कि यह बहुत अफ़सोस की बात है कि जिस मुल्क को बड़ी जद्दोजहद के बाद आज़ाद कराया गया था, आज कुछ फ़िर्क़ापरस्त लोग इस मुल्क को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं और मुल्क के अमन व अमान को बरबाद करने पर तुले हुए हैं। लेकिन हम अपने बुज़ुर्गों के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए इस मुल्क और इसके बाशिंदों की जान, माल और इज़्ज़त-ओ-आबरू के तहफ़्फ़ुज़ के लिए किसी भी कुर्बानी से दरेग नहीं करेंगे और संजीदा बरादरान-ए-वतन के साथ हमारे मुज़ाकरात का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा ताकि यह मुठ्ठीभर शरपसंद लोग अपने नापाक मक़ासिद में कामयाब न हो सकें और आलमी सतह पर हमारा मुल्क अमन और इंसाफ़ की मिसाल बनकर उभरे।इस मौके पर शहर के कई मुअज़्ज़िज़ लोग भी मौजूद रहे।



