संगरुरू/ मालेरकोटला 9 सितम्बर। जानकारी के अनुसार आज 10 बजे जमीअत उलमा के प्रदेश कार्यालय स्थित मदरसा ज़ीनतुल उलूम रायकोट रोड पर एक दीनी प्रोग्राम का आयोजन किया गया। जिस में पंजाब प्रदेश के सभी 23 जिलों से बड़े बड़े धर्मगुरूओं अतः विद्वानों ने शिरकत की। प्रोग्राम के आयोजन का मुख्य कारण प्रदेश भर में जमीअत उलमा की जिला वार यूनिटों को कायम कर के उन को मज़बूत बनाना अतः केंद्रीय सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड एक्ट 2013 में किए जा रहे संशोधनों से जनता को अवगत करा के मुसलमानों के इस धार्मिक मुआमले में हस्तक्षेप न करने की मांग को तेज करना था।
इस प्रोग्राम की सदारत फरमा रहे पंजाब के प्रदेशीय अध्यक्ष, मुफ़्ती ए आज़म पंजाब, मुफ़्ती मोहम्मद ख़लील साहब कासमी जी ने अपने भाषण में सरकार को सख़्त चेतावनी देते हुए कहा कि वक़्फ़ प्रोपर्टीज मुसलमानों का निजी और धार्मिक मुद्दा है जिस में किसी भी तरह का सरकारी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस बिल को ला कर वक़्फ़ जायदादों को हड़पना चाहती है और मुसलमानों को टार्गेट कर रही है।
उन्होंने कहा कि अब मुसलमान किसी भी हाल में चुप नहीं बैठेगा जब तक कि सरकार इस बिल को वापस न ले ले।वहीं जमीअत के प्रदेश महासचिव मुफ्ती मौहम्मद यूसुफ साहब कासमी ने अपने भाषण में कहा कि इस देश को आज़ाद कराने में सब से बड़ा योगदान मुसलमानों के पूर्वजों का है तो फिर केंद्रीय सरकार बार बार इस तरह के बिल ला कर क्यों मुसलमानों को तंग कर रही है?
मुसलमान अपने देश के सच्चे वफादार हैं जो किसी भी हाल में देश के नुकसान को बर्दाश्त नहीं करेंगे। और वक़्फ़ एक्ट में छेड़ छाड़ यह देश के माहौल को खराब करने जैसा है। उन्होंने कहा कि देश के सभी secular mind लोगों को इस बिल के खिलाफ इस के वापस होने तक डत कर मुसलमानों का साथ देना चाहिए।
प्रोग्राम के संचालक मुफ़्ती वसीम अकरम क़ासमी जी ने सूबे से आने वाले सभी मेहमानों का हृदय से धन्यवाद किया और कहा कि जमीअत उलमा ए हिंद मुसलमानों की सब से पुरानी और मज़बूत धार्मिक संस्था है, जिस के मौजूदा अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद अर्शद साहब मदनी हैं। हम सब को जमीअत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा। ताकि इस प्लेट फार्म द्वारा आने वाली हर समस्या का समाधान संभव हो।
इस प्रोग्राम में मुख्य अतिथी के तौर पर पधारने वालों में “मुफ्ती इरतिका उल हसन साहब, मौलाना मुजतबा यज़दानी, मुफ्ती नजीर, मौलाना एहतिशाम, मौलाना अब्दुल गफूर, हाफिज अमीर हमजा, कपूरथला से मौलाना अमानुल्ला मजाहिरी, हाजी गुलाम सर्वर सब्बा, फतेहगढ साहब से हाजी बाबा दिलशाद, मानसा से HR मौफ़र खान, लुधियाना से कारी गय्यूर आदि मौजूद रहे।
अखीर में मुफ़्ती ख़लील साहब क़ासमी जी ही की दुआ पर यह प्रोग्राम समाप्त हुआ।



