मजीठा मस्जिद में इफ्तार दावत का किया गया आयोजन
अमृतसर। मजीठा मस्जिद के इमाम मोलाना इरशाद साहब द्वारा रमज़ान के पवित्र महीने के 20 वें रोज़े पर इफ्तार दावत का आयोजन किया गया।
जिसमें विशेष रूप से मजलिस अहरार इस्लाम ए हिंद के पंजाब प्रधान अब्दुल नूर और ह्यूमन राईटस प्रधान खुर्शीद अहमद शामिल हुए। इस इफ्तार दावत में आपसी सदभावना को बढ़ाते हुए हिंदू और सिक्ख भाईचारे के लोगों ने भी हिस्सा लिया।
इसके अलावा अलग अलग मस्जिदों के इमाम साहिबान ने भी इस इफ्तार दावत में शिरकत की। इस मौके पर बातचीत करते हुए मजलिस अहरार प्रधान अब्दुल नूर ने कहा कि रमज़ान का पवित्र महीना रहमतों और बरकतों का महीना है। जिसमें इंसान द्वारा किए जाने वाले नेक कामों का अज़र यानी फल बढा दिया जाता है।
नूर ने कहा कि रमज़ान का एक महीना बाकी 11 महीनों की प्रैक्टिस होती है कि जिस तरह से हम रमज़ान में अपने आपको फालतू बातों से गुनाहों से बचाकर रखते हैं। उसी प्रकार हम बाकी के 11 महीने भी उसी तरह से बिताएं। नूर ने कहा कि रोज़े रख कर हमारी इच्छा शक्ति मज़बूत होती है। और हमें अपनी इच्छाओं पर काबू पाने का हुनर आ जाता है।
नूर ने कहा कि अब रमज़ान का आखिरी अशरा चल रहा है हमें चाहिए कि हम इसमें अपना ज्यादा समय इबादत में ही गुजारें। इस मौके पर ह्यूमन राईट प्रधान खुर्शीद अहमद ने कहा कि रमज़ान के पवित्र महीने में आपसी भाईचारे को और मज़बूती मिलती है।
जब इफ्तार के मोके पर सभी एक जगह बैठकर रोज़ा इफ्तार करते हैं। वहीं मजीठा मस्जिद के इमाम और मजलिस अहरार के अमृतसर देहाती प्रधान हाफिज़ इरशाद साहब ने कहा कि हमें रमज़ान के पवित्र महीने की अहमियत को समझ कर इस मुबारक महीने में ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में ही गुज़ारना चाहिए।
इस मौके पर तरनतारन के इमाम शहजाद अहमद कलानोर के इमाम हबीब आलम, मोलाना मोहसिन नसीम अहमद, आसिफ अली , माज़ रहमान , उबेद हुसैन, अहमद हसन,आदि मोजूद थे।




