चंडीगढ़, 8 सिंतबर : पंजाब पुलिस में एसपी के तौर पर कार्यरत महिला के पास बच्चे को अवैध हिरासत में बताते हुए पेशे से डॉक्टर जैविक मां ने कस्टडी के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह दो परिवारों के बीच का विवाद है और इस तरह के मामलों का फैसला फैमिली कोर्ट करती है और ऐसे में अदालत ने दोनों पक्षों को वहीं जाने की सलाह दी है। साथ ही इस विवाद का निपटारा होने तक जैविक मां को हर सप्ताह के अंत में दो दिन बच्चे से मिलने का अधिकार भी दिया है।
कोरोना के दौर में छोड़ा था बच्चा
मानसा निवासी बच्चे की जैविक मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि वह एक डॉक्टर है और उसकी भाभी पंजाब पुलिस में एसपी है। कोरोना के दौर में उसे अपनी ट्रेनिंग के लिए पूना जाना था और इस दौरान वह अपने बच्चे को अपने माता-पिता व भाई-भाभी के पास उसके हित को देखते हुए छोड़ गई थी। जब वह आई और बच्चे को वापस सौंपने को कहा तो उसकी भाभी जो पंजाब पुलिस में है उसने साजिश के तहत गोद लेने के दस्तावेजों पर जबरन याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर करवा लिए।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को फैमिली कोर्ट जाने की सलाह देते हुए बच्चे की दत्तक मां को निर्देश दिया कि वह जैविक माता-पिता को हर सप्ताह के अंत में नाबालिग बच्चे से मिलने का अधिकार दे। कोर्ट ने कहा सभी पक्ष अपने मतभेदों को किनारे रखकर बच्चे के कल्याण को प्राथमिकता दें और सभी को सामूहिक प्रयास करना चाहिए कि नाबालिग पर अत्याचार न हो।
दोनों पक्षों से जुड़ाव जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि गोद लिए बच्चे को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि अदालत के आदेश को लागू करने के लिए जबरदस्ती उसे एक माता-पिता से दूसरे माता-पिता के पास ले जाया जा रहा है। बच्चे की कस्टडी किसे मिलेगी इसका फैसला फैमिली कोर्ट करेगी। ऐसा होने के बाद जिस पक्ष को भी अधिकार मिले बच्चा उनके पास सहज महसूस करे इसके लिए दोनों पक्षों के साथ उसका जुड़ाव जरूरी है। ऐसे में जैविक अभिभावक व दत्तक अभिभावक दोनों के साथ उसे समय बिताने का मौका दिया जाना चाहिए।



