रोहतक, 30 सितम्बर । हरियाणा के रोहतक शहर के एक निजी अस्पताल में एक शर्मनाक घटना सामने आई है। 21 सितम्बर को अस्पताल में दाखिल एक मरीज की 29 सितम्बर को तकरीबन दो बजे के आसपास मौत हो जाती है। तरुण नाम के इस 35 वर्षीय मरीज के इलाज का तकरीबन 5 लाख 30 हजार रुपए बिल बनाया गया। इस मरीज के साथ उसकी मां थी और वह भी बिल्कुल अकेली। अस्पताल को वह पहले ही एक लाख 30 हजार रुपए दे चुकी थी, उसके पास बाकी पैसे देने के लिए नहीं थे।
जब उसने अस्पताल के सामने अपनी बेबसी बताई तो अस्पताल प्रबंधन ने साफ इनकार कर दिया और कहा कि जब तक बकाया 4 लाख रूपए नहीं मिलेंगे, तब तक वो तरूण की डेड बॉडी नहीं देंगे। मृतक तरुण की मां ने पैसे का इंतजाम करने की कोशिश की लेकिन उसे कहीं से भी पैसे नहीं मिल पाए क्योंकि इससे पहले भी वह इस अस्पताल में इलाज के लिए तकरीबन 17-18 लाख रुपए खर्च कर चुकी थी, ताकि उसके बेटे की जान बच सके।
अब उसके पास पैसे नहीं थे और तरुण की भी मौत हो गई, इसलिए वह पूरी तरह से बेबस और लाचार थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा और उन्होंने साफ तौर पर इंकार कर दिया कि जब तक पैसे नहीं मिलेंगे, तब तक बॉडी नहीं मिलेगी। बेबस मां पूरा दिन और पूरी रात बेटे की डेड बॉडी के इंतजार में अस्पताल की मिन्नतें करती रही, लेकिन किसी का भी दिल नहीं पसीजा। इसके बाद शनिवार सुबह कहीं से फोन नंबर लेकर महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू को उन्होंने फोन किया, ताकि किसी तरह की मदद मिल सके।
कुंडू अस्पताल में पहुंचे और प्रबंधन से बात की और कहा कि वह 50 हजार रूपए अपने पास से दे देंगे, डेड बॉडी दे दी जाए लेकिन अस्पताल प्रबंधन नहीं माना और फोन पर काफी गरमा गरम बहस भी हुई। इसके बाद मामला बिगड़ता देख अस्पताल के सीनियर डॉक्टर जिले सिंह कुंडू ने मध्यस्थता कर बकाया बिल माफ किया और बेबस मां को उसके बेटे की डेड बॉडी सौंपी। तरुण की मां ने बताया कि उसका बेटा काफी लंबे समय से पेनक्रियाज इंफेक्शन से पीड़ित था, कई जगह उसका इलाज कराया। इस अस्पताल में भी पहले इलाज के लिए 18 लाख रुपए दे चुकी है।
पीड़ित मां ने बताया कि अब उनके पास पैसे नहीं थे, इसलिए नहीं दे पाई। पीड़िता ने बताया कि मैंने मेडिकल प्रबंधन को यह भी कहा कि वह पैसे धीरे-धीरे दे देगी, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। विधायक बलराज कुंडू के दखल के बाद उन्हें उनके बेटे का शव मिला है। दूसरी तरफ बलराज कुंडू ने बताया कि महिला ने उनके पास फोन किया था। वो गुरुग्राम में थे, सुबह अस्पताल में आए तो मेडिकल प्रबंधन ने बॉडी देने से इनकार कर दिया।
जब यहां के डॉक्टर जिले सिंह कुंडू से बात की तो वह सहमत हुए कि इस तरह से डेड बॉडी ना देना कितना शर्मनाक है। उन्होंने मदद की, वह उनका धन्यवाद करते हैं, लेकिन इस तरह की हरकत नहीं करनी चाहिए। इस पूरे प्रकरण पर अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की तो कैमरे के सामने कोई नहीं आया।



