नई दिल्ली, 06 अप्रैल। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड संसद द्वारा पारित वक़्फ़ संशोधनों को इस्लामी परंपराओं, धर्म और शरीयत, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वतंत्रता, धार्मिक सौहार्द्र, सांप्रदायिक एकता और भारतीय संविधान के मूल ढांचे पर एक घातक हमला मानता है। जिन राजनीतिक दलों ने इस सांप्रदायिक योजना में भाजपा का साथ दिया उनकी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता की नक़ाब पूरी तरह उतर चुकी है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यह आवश्यक समझता है कि सभी धार्मिक, सामुदायिक और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर इन संशोधनों के खिलाफ एक देशव्यापी आंदोलन तब तक चलाया जाएगा जब तक कि इन्हें पूरी तरह से वापस नहीं ले लिया जाता। इसी प्रकार, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भारत के मुसलमानों को यह भरोसा दिलाता है कि उन्हें हताश या निराश होने की कोई ज़रूरत नहीं है। उनका नेतृत्व इस मामले में किसी भी प्रकार के बलिदान से पीछे नहीं हटेगा और देश की सभी न्यायप्रिय ताक़तों को साथ लेकर संवैधानिक दायरे में इन काले क़ानूनों के खिलाफ मजबूत आंदोलन चलाएगा। इन भावनाओं और संकल्पों का इज़हार आज बोर्ड के पदाधिकारियों और विशेष आमंत्रित सदस्यों की बैठक में किया गया, जिसकी अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह रहमानी ने की।
बोर्ड के महासचिव मौलाना फज़ल रहीम मुजद्दिदी ने देशव्यापी आंदोलन की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि बोर्ड न केवल क़ानूनी मार्ग अपनाकर इन अन्यायपूर्ण संशोधनों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगा बल्कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध-प्रदर्शन करेगा। इस दौरान धरने, प्रदर्शन, काली पट्टियां बांधकर प्रतीकात्मक विरोध, अन्य समुदायों के साथ संवाद, बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी।
प्रत्येक राज्य की राजधानी में मुस्लिम नेतृत्व प्रतीकात्मक गिरफ्तारियां देगा, जबकि ज़िला स्तर पर भी धरनों का आयोजन किया जाएगा। धरनों के समापन पर राष्ट्रपति और गृहमंत्री को जिलाधिकारी और कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपे जाएंगे। पहले चरण के कार्यक्रमों में एक पूरा सप्ताह (एक शुक्रवार से अगले शुक्रवार तक) “वक़्फ़ बचाओ, संविधान बचाओ” अभियान के रूप में मनाया जाएगा।
इस दौरान विभिन्न कार्य किए जाएंगे, जिनमें अन्य समुदायों के साथ राउंड टेबल बैठकें मुख रहेंगी। इनमें सरकार और सांप्रदायिक ताकतों द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों को तर्क और तथ्यों के माध्यम से दूर किया जाएगा। इसी क्रम में दिल्ली में विभिन्न धर्मों और उनके वक़्फ़ संस्थानों के ज़िम्मेदार लोगों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु, विजयवाड़ा, पटना, रांची, मलेरकोटला और लखनऊ में बड़े विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इस आंदोलन की शुरुआत दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक बड़े जनसभा से होगी। पहले चरण के ये सभी कार्यक्रम ईद-उल-अज़हा तक जारी रहेंगे, इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बोर्ड के महासचिव ने सभी मुसलमानों, विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे धैर्य, संयम और दृढ़ता के साथ अपने रुख़ पर अडिग रहें। लेकिन भावनाओं में बहकर कोई ऐसा क़दम न उठाएं जिससे सांप्रदायिक ताक़तों और शरारती तत्वों को उकसावे का अवसर मिले। बोर्ड अपील करता है कि इस आंदोलन को संगठित और योजनाबद्ध तरीके से चलाएं और व्यक्तिगत स्तर पर कोई भी क़दम न उठाएं बल्कि बोर्ड के निर्देशों के अनुसार इस अभियान में सहयोग करें।



