मेरठ। मेरठ मेडिकल कॉलेज के एआरटी यानि एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर में हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। बताया गया कि सोलह महीने में अब तक कुल 81 महिलाओं में एचआईवी की पुष्टि हुई है जिसमें से पैंतीस महिलाए पहले से ही इस रोग से ग्रसित थीं। अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक कुल तैंतीस नए केस प्रसव के दौरान पाए गए हैं। यानि एक साल में 68 महिलाओं में एचआईवी की पुष्टि हुई है। जबकि इस वर्ष प्रसव कराने आईं कुल तेरह महिलाओं में एचआईवी की पुष्टि हुई है।
यानि अगर सोलह महीने के नए केसेज की बात की जाए तो कुल 46 नए केस एचआईवी के आए हैं। जबकि 35 केस पहले से ही रजिस्टर्ड थे। ये आंकड़ा अकेले मेरठ का नहीं बल्कि आसपास के ज़िलों का भी है। यानि मेरठ के आसपास कई जिलों के मरीज क्योंकि यहां दिखाने आते हैं।
इसलिए कई जिलों के मरीजों का ये आंकड़ा है। एआरटी सेंटर के नोडल अधिकारी बताते हैं कि अब इन महिलाओं के शिशुओं की भी जांच अट्ठारह महीने बाद की जाएगी। अट्ठारह महीने की उम्र होने पर ही बच्चों का टेस्ट किया जाता है। उसके बाद एचआईवी पॉजिटिव या निगेटिव होने की पुष्टि होती है।
मेरठ के सीएमओ डॉक्टर अखिलेश मोहन ने प्रसव के दौरान महिलाओं में एचआईवी पाए जाने की पुष्टि की है। डॉक्टर अखिलेश मोहन ने कहा कि इस बावत एक जांच कमेटी भी बनाई गई है। गौरतलब है कि एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। दूषित सिरिंज या ब्लेड आदि का प्रयोग संक्रमति मरीज के रक्त का इस्तेमाल असुरक्षित तरीके से टैटू बनवाना असुरक्षित यौन संबंध आदि से एचआईवी होने का खतरा रहता है। एचआईवी पॉज़िटिव व्यक्ति के निकट संपर्क से नहीं फैलता है।



