मदरसा शेख अहमद सरहिंदी खन्ना में शामिल हुए सैकड़ों हिंदू, सिख और मुस्लिम नेता
खन्ना,19 फरवरी। प्रसिद्ध राजनीतिक और सामाजिक हस्ती कारी शकील अहमद मोहतमिम मदरसा शेख अहमद सरहिंदी खन्ना और अध्यक्ष ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल पंजाब की देखरेख में मदरसा परिसर में शांति और एकता सम्मेलन के शीर्षक के तहत एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।जिसमें विशेष अतिथि के रूप में श्री गुरकीरत सिंह पूर्व विधायक खन्ना एवं राज्य मंत्री कांग्रेस सरकार पंजाब, बाबा प्रीतम समाज से मनजीत सिंह वालियां आम आदमी पार्टी, गुरमेर सिंह काला, अमरेस कालिया और मुफ्ती मुहम्मद आरिफ लुधियानवी मुफ्ती ए शहर लुधियाना और संयोजक जमीयत उलेमा हरियाणा -पंजाब ने भाग लिया।
कारी शकील अहमद ने अपने दो पोतों मुहम्मद अहद पिता मुहम्मद इंतिजार एवं हुसैन अहमद पिता मुहम्मद तालिब के अकीका निमंत्रण में शामिल विभिन्न धर्मों के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि एकता में अनेकता ही हमारे देश भारत की असली पहचान है।हमें इस देश की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए गंगा-जमनी संस्कृति को बढ़ावा देना होगा और ऐसी किसी भी ऐसी बात और काम से बचना होगा जिससे इस देश और यहां के लोगों को फायदे की जगह नुकसान हो।
श्री गुरकीरत सिंह, पूर्व विधायक खन्ना एवं राज्य मंत्री, कांग्रेस सरकार पंजाब ने कहा कि समय की जरूरत है कि हम विभिन्न अवसरों पर एक साथ एकत्रित होकर अपने पूर्वजों की तरह सद्भाव, एकता, भाईचारा और प्रेम की मिसाल कायम करें और देश के विकास में संयुक्त भूमिका निभाएं।
मुफ्ती मुहम्मद आरिफ लुधियाना, मुफ्ती ए शहर लुधियाना ने कहा कि उनके नाना मौलाना कारी मुहम्मद हाशिम खलीली गोमटवी, पूर्व इमाम और खतीब जामा मस्जिद और ईदगाह मालेरकोटला पंजाब की पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह के साथ मुलाकात रही है और उन दोनों द्वारा मालेरकोटला की खूबसूरत ईदगाह की आधारशिला रखी गई थी। गुरकीरत सिंह से होने वाली इस मुलाकात को अपनी जिंदगी का एक यादगार लमहा करार दिया।
ईशा की नमाज के बाद मदीना मस्जिद खन्ना में तकरीर के दौरान मुफ्ती ए शहर लुधियाना ने कहा कि कारी शकील अहमद ने बड़े पैमाने पर दावत-ए-अकीका का आयोजन करके और विभिन्न धर्मों के जिम्मेदार व्यक्तित्वों की भागीदारी सुनिश्चित करके बहुत अच्छा संदेश दिया है।
इस मौके पर हफीजुद्दीन, मुहम्मद मुजीब, मदीना मस्जिद खन्ना के इमाम और खतीब, मुहम्मद शाकिर, मुफ्ती मुहम्मद हुजैफा मजाहिरी, मुहम्मद काजिम, हाजी अशरफ, अजमत अली, अबुल हसन, तसलीम, वसीम अहमद, फिरोज आलम, हाजी आबिद, मास्टर मुहम्मद यासीन, ईजहार आलम, मुहम्मद नदीम और मुहम्मद सिराज, चाचा इस्माइल आदि भी मौजूद रहे।



