Thursday, April 9, 2026
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मौलाना अरशद मदनी की अपील पर यू.पी के रामपुर जिले की जमीयत उलेमा की एक टीम बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए पहुंची पठानकोट

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बिना किसी धर्म या समुदाय के भेदभाव के मानवता की सेवा के लिए जानी जाती है जमीयत उलेमा-ए-हिंद:मुफ्ती वसीम अकरम कासमी

रामपुर/संगरूर,22 सितम्बर। हाल ही में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के कारण देश के कई राज्यों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। लोगों की जानमाल के नुकसान के साथ-साथ आर्थिक क्षति भी बहुत हुई है। हजारों लोग बेघर हो गए हैं और लाखों हेक्टेयर जमीन की फसलें तबाह हो चुकी हैं। कई लोगों की भैंसें बह गईं, तो कईयों के मुर्गी फार्म पूरी तरह नष्ट हो गए। ऐसे हालात में जमीयत उलेमा-ए-हिंद, जो बिना किसी धर्म या समुदाय के भेदभाव के मानवता की सेवा के लिए जानी जाती है, ने मौलाना अरशद मदनी की अपील पर पूरे देश में राहत कार्यों का जो सिलसिला शुरू किया, वह अविस्मरणीय और ऐतिहासिक दस्तावेजों में दर्ज होने योग्य है।
उत्तराखंड के देहरादून क्षेत्र, बिहार, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पंजाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीयत उलेमा की टीमें लगातार प्रभावित लोगों के घर-घर जाकर उन्हें सहायता प्रदान करने में जुटी हुई हैं।
आज, उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की जमीयत उलेमा की एक टीम, मौलाना असलम जावेद अलकासमी की अध्यक्षता में और जमीयत उलेमा पंजाब की संगरूर जिला इकाई के अध्यक्ष मुफ्ती वसीम अकरम कासमी के मार्गदर्शन में, पठानकोट के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची। क़ारी फ़ुरक़ान करीमी(अध्यक्ष जमीयत उलेमा पठानकोट) ने अपने साथियों सहित इस टीम का भव्य स्वागत किया।
इस टीम ने प्रभावित लोगों का सर्वेक्षण करने के बाद मॉडल कॉलोनी के 26 घरों, कोलियां के 30 घरों और 30 गुर्जर भाइयों की झोपड़ियों में रह रहे मरीजों को आर्थिक सहायता प्रदान की। इस वफद में हजरत मुफ्ती मोहम्मद साजिद साहब (शैखुल हदीस, मदरसा फैजुल उलूम, थाना टांडा, रामपुर), मौलाना फुरकान साहब, कारी उबैदुल्लाह फैजी, और मौलाना समीउल्लाह साहब विशेष रूप से शामिल थे।
लगभग 75 लोगों को नकद रूप में चार-चार हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई, ताकि प्रभावित लोग अपने इलाज, कुछ घरेलू सामान, और बच्चों की अस्थायी जरूरतों का इंतजाम कर सकें। इसके साथ ही, जमीयत उलेमा के कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मौलाना अरशद मदनी के नेतृत्व में जमीयत उलेमा-ए-हिंद का मिशन, जो देश और इसके निवासियों की बिना भेदभाव के सेवा करना है, किसी भी हाल में कमजोर नहीं होगा। खास तौर पर इन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की राहत कार्यों की मुहिम उसी तरह जारी रहेगी, जब तक लोगों का जीवन सामान्य नहीं हो जाता। यह सेवा कार्य केवल यहीं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जहां कहीं भी जरूरत होगी, वहां मौलाना अरशद मदनी की अपील पर उनके कार्यकर्ता मानवता की सेवा में सबसे आगे नजर आएंगे। इंशा अल्लाह।

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