Sunday, April 12, 2026
No menu items!
Google search engine

पुलकित देखो किसान,खेत खड़ी फसल धान, करता वह ईश गान,नित्य शीश झुकाता।

Spread the News

आधार छंद हरिप्रिया
“पुलकित देखो किसान”

पुलकित देखो किसान,खेत खड़ी फसल धान,
करता वह ईश गान,नित्य शीश झुकाता।
माटी को मात मान,पशुधन का रखे ध्यान,
स्वेद बूँद देह सान,यूँ जीवन जीता।
विकट समय रखे आस,जब तक है देह श्वास,
हर क्षण है मुख सुहास, हिम्मत है जागी।
ताक रहा आसमान,बरखा का झूम गान,
करता है अन्न दान,हलधर है त्यागी।।

स्वेत बूँद छलक माथ,छिल उसके गए हाथ,
गाय बैल रहें साथ,श्रम कितना करता।
भूख प्यास सभी भूल,धरा उगा कंदमूल,
हल कांधे रहा झूल,उदर सभी भरता।।
तापस सम वह महान,धूप छाँव है समान,
पुलकित देखो किसान, मेघा जब बरसे।
खेत खड़ा दिवस रात,धरती को मान मात,

बीज खिले दिखे पात,कितना तब हरसे।।

मौलिक सृजन
ऋतु अग्रवाल
मेरठ

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments