चंडीगढ़। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग शनिवार देर रात GMSH-16 में मरीज बनकर पहुंचे और अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने जांच में पाया कि एमरजेंसी के डॉक्टर मरीजों को दवाई का सॉलट की जगह ब्रांडेड दवाईयाँ लिख रहे हैं। इसके चलते अस्पताल की तीनों दवाईयों की दुकानों पर भी मरीजों को बिना मांगे दवाई का बिल नहीं दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य सचिव ने 2 जनवरी 2023 को जारी जेनेरिक मैडीसन और नुस्खे के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि डॉक्टरों को दवाओं के बजाय ब्रांडेड सॉलट लिखने का निर्देश दिया गया है। लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है। विभाग ऐसे डॉक्टरों की पहचान कर रहा है और जल्द ही उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य सचिव ने ड्रग इंस्पेक्टर समेत अस्पताल प्रशासन से विभिन्न खामियों की जांच करने को कहा और रिपोर्ट तलब की है। रात 10 बजे यशपाल गर्ग अस्पताल पहुंचे और करीब एक घंटे तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। पहले वह मरीज बनकर इमरजेंसी रूम में गए, डॉक्टर के पूछने पर उसने अपना नाम राजपाल बताया और पेट दर्द की शिकायत की। डॉक्टर ने उन्हें एक इंजेक्शन और MCAIN सिरप दिया।
डॉक्टर ने कहा कि यह इंजेक्शन पास के कमरे में लगेगा जबकि सिरप दवाई की दुकान से लेनी होगी। जब वे अस्पताल में दवाई की दुकान पर पहुंचे तो उन्हें डॉक्टर द्वारा लिखा गया 225 रुपये का सिरप मिला। पूछने पर दुकानदार ने उन्हें बिल दिया, जो 227 रुपये का बना था।
स्वास्थ्य सचिव का कहना है कि दुकान नंबर 9 पर दवा वापस करने पर दुकानदार ने पुराने सीरियल नंबर पर ही 135 रुपये का नया बिल बना दिया, जो कि मियार के हिसाब से गलत है। इस संबंध में उन्होंने चारों बिल की कॉपी ड्रग इंस्पैक्टर को सौंपी और मामले की जांच के निर्देश दिए।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दुकानदार बिना मांगे मरीजों को बिल नहीं दे रहे हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए। कहा कि एमरजैंसी स्थिति में औषधीय नमक के बजाय किसी खास ब्रांड की दवा लिखने के कारण का पता लगाना जरूरी है। दुकान नंबर 6 को यह भी पता लगाने को कहा गया है कि दवाई बनाने वाली कंपनी से किस कीमत पर दवा खरीदी गई थी।
इसके बाद वे दूसरी दवा दुकान (नंबर 9) पहुंचे। डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन दिखाने पर दुकानदार ने कहा कि सीरप के सॉल्ट का नाम नहीं लिखा है। यह एक विशिष्ट ब्रांड का सिरप है जो हर जगह उपलब्ध नहीं होता है। इसके बाद दुकानदार ने एक और सिरप MERKCID SYP दिया, जिसकी कीमत 100 रुपये थी और डॉक्टर को दिखाने को कहा।
डॉक्टर को दिखाने पर उन्होंने इसे इस्तेमाल करने से साफ मना कर दिया और डॉक्टर के पर्चे पर दवाई का सॉल्ट लिख दिया। इसके बाद वे तीसरी दुकान (7 नंबर) पर पहुंचे, जहां 135 रुपए की दवा मिली, लेकिन यहां भी बिल नहीं दिया। बाद में मांगने पर दुकानदार ने उन्हें बिल दे दिया।



