सुल्तानपुर लोधी। डॉ.सुनील धीर जनपद कपूरथला की पावन नगरी सुल्तानपुर लोधी स्थित सिख पंथ के प्रवर्तक गुरू नानक देव जी से संबंधित गुरूद्वारा श्री बेर साहिब विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल व समूह नानक नाम लेवा संगत की असीम आस्था का महान केंद्र है। बताया जाता है श्री गुरु नानक देव जी सुल्तानपुर लोधी में रहते समय प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त के समय बेईं नदी के किनारे भाई भगीरथ मलसियां वालों को वस्त्रों की सेवा देकर स्नान करते और ‘वाहिगुरु’ के ध्यान में लीन हो जाते। सूर्योदय होते ही आप घर लौट आते और मोदीखाने का कार्य करते।
यहां उस समय एक दरवेश अल्लाहदित्ता जिसको खरबूजे शाह भी कहते थे, रहता था। वह गुरु नानक देव जी का भक्त बन गया। अंतिम दिनों में जब गुरु जी इस संसार के कल्याणहित चार उदासियों हेतू यहां से जाने लगे तो इस फकीर ने विनती की, कि हजूर ! मैं आपके दर्शन किए बिना नहीं रह सकता, अब आपके दर्शन कब होंगे ? गुरु साहिब ने उस समय अपने करकमलों से लगाई बेरी की दातुन की ओर संकेत करके कहा- “इसके दर्शन कर लेना, हमारे दर्शन हो जाएंगे।”
फकीर कहने लगा, “यह वृक्ष चिरस्थाई नहीं है।
बाढ़ का जल इसको बहाकर ले जा सकता है या कोई अज्ञानी व्यक्ति इसको काट कर फेंक सकता है, फिर क्या होगा ? ” गुरु जी ने कहा, “साईं जी ! विश्वास करो, यह बेरी सदा कायम रहेगी। इसकी जड़ें पाताल में लगी समझो। लोग यहां से मुरादें प्राप्त किया करेंगे।”इस ऐतिहासिक स्थान पर अब एक आकर्षक इमारत सुशोभित है, जिसका नाम गुरु साहिब की ओर से लगाई गई दातुन जो बाद में बेरी का पेड़ बनी और जो आज भी उपस्थित है, के नाम पर ‘गुरुद्वारा श्री बेर साहिब’ है।
यह हमारे देश का एक बहुत बड़ा गुरुद्वारा व दर्शनीय स्थल है। यहां आने वाले श्रद्धालु को उस एतिहासिक बेरी के दर्शन होते हैं। जरूरतमंद लोग यहां अपनी मंन्नत पूरी करते हैं । गुरुद्वारा श्री बेर साहिब के पास ही ‘मंजी साहिब’ दीवान स्थान है, जहां काली बेईं नदी के किनारे सुंदर स्नान घर और तेरह सीढ़ियों वाला सरोवर बना हुआ है ताकि श्रद्धालु यात्री आसानी से चरणामृत ले सकें और स्नान कर सकें। दूसरी ओर एक बहुत सुंदर गुरु नानक लंगर की इमारत है और एक ओर गुरु नानक निवास की दो मंजिला इमारत बनी हुई है।
गुरुद्वारा साहिब के पूर्व की ओर सुन्दर दर्शनीय ड़ियोढी और बहुत बड़ा दीवान हॉल तैयार हो चुका है। स्टाफ के रहने के लिए क्वाटर्ज हैं और सुन्दर दर्शनी ड़ियोढी के साथ कढ़ाह प्रसाद, गुरुमत पुस्तकालय और अन्य कमरे भी हैं । यह अति सुन्दर गुरुद्वारा परिसर बहुत ही आकर्षक स्वरूप धारण कर गया है। श्रद्धालु यहां बड़े उत्साह और श्रद्धा से श्री अखण्ड पाठ साहिब करवाते हैं। अमावस को बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालू यहां दर्शन करने आते हैं।
पावनबेईं में जल का बहाव ब्यास नदी से शुरू करवाने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व पद्म श्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल की ओर से प्रयत्न किया जा रहा है। इससे पावन बेईं का प्राचीन गौरव फिर से लौट आएगा। श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर हर वर्ष कार्तिक सुदी पूर्णिमा के दिन अनगिणत श्रद्धालू यात्रा के लिए आते हैं। इस दिन और हर अमावस्या पर गुरुद्वारा बेर साहिब में जोड़ मेला लगता है और अमृत- संचार भी होता है।



