क़ुर्बानी केवल अल्लाह के लिए और हज़रत इब्राहीम की सुन्नत का पालन करने के लिए किया जाना चाहिएःमौलाना मोहम्मद अशरफ़ रजा क़ादरी
लुधियाना। हज़रत अल्लामा मौलाना मोहम्मद अशरफ़ रजा क़ादरी,ख़तीब और इमाम साबरी जामे मस्जिद,फामरा रोड दानामंडी लुधियाना पंजाब के हज़ारों नमाज़ियों को संबोधित करते हुए क़ुर्बानी का उद्देशय बताते हुए कहाँ हर साल मलिके नेसाब मुसलमान करना इसे लाज़िम है ।अल्लाह के रेज़ा और ख़ुशी के लिए क़ुर्बानी करे। अल्लाह पाक सर्वशक्तिमान दिलो की स्थिति से अवगत है। ना ही दिखावा करे बल्कि क़ुर्बानी केवल अल्लाह के लिए और हज़रत इब्राहीम की सुन्नत का पालन करने के लिए किया जाना चाहिए ।
अल्लाह उन बंदों की क़ुर्बानी क़बूल करते जिनके कर्म पवित्र है । हज़रत ज़येद इब्न अकरम की रिवायत बयान करते हुए उन्होंने कहाँ के क़ुर्बानी हज़रत इब्राहिम की सुन्नत है और इस क़ुर्बानी का इनाम क़ुर्बानी के जानवर के हर एक बाल के बदले दस नेकियाँ देंगी । इस मौक़े पर जामिया साबरीया हनफ़ीया के नाज़िमे आला हज़रत साजिद रजा निज़ामी ,नायब इमाम हफ़ीज़ वा क़ारी मोहम्मद जियाउद्दीन जियाई ,हज़रत मौलाना मोहम्मद हैदर रज़ा बरकाती ,सदरे आला मोहम्मद निज़ामुद्दीन,जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद नाज़िर हुसैन ,कोषाध्यक्ष मोहम्मद कौसर ,सचिव मोहम्मद शमशाद ,उप कोषाध्यक्ष मोहम्मद मोज़ीबुल ,फ़िरोज़ ‘इंतज़ामिया कमीटी के अध्यक्ष सोनू जी (अब्दुल अज़ीज़ साहब ) उपाध्यक्ष ज़ुबैर ,रोशन अफरोज ,हारून आलम ,और अन्य सदस्य जैसे तमन्ना ,मक़सूद ,दुखा ,केताबुल ,अली हुसैन ,हाजी बशीर ,इसराफ़िल,अहमद ,अलाउद्दीन,और सोबराती शामिल थे ,और सहर के कई महान विद्ववान और मुफ़्ती मौजूद थे।



