Tuesday, August 4, 2026
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…….लेकिन कश्मीर के मुद्दे पर ये सब चुप्पी खींचे रखते हैंः डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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नई दिल्ली। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने अनजाने ही कश्मीर के सवाल पर पाकिस्तान की नाकामी को उजागर कर दिया है। वे न्यूयार्क में एक प्रेस-काॅफ्रेस को संबोधित कर रहे थे। कश्मीर का स्थायी राग अलापते-अलापते उनके मुंह से निकल गया कि कश्मीर के सवाल को अंजाम देना बहुत ‘‘ऊँची चढ़ाई’’ है। इस बात को बिलावल के नाना जुल्फिकार अली भुट्टो अब से 51 साल पहले ही समझ गए थे, जब 1972 के शिमला समझौते में उन्होंने दो-टूक शब्दों में स्वीकार किया था कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय विवाद है।

द्विपक्षीय याने इस विवाद का ताल्लुक सिर्फ भारत और पाकिस्तान से है। इसमें किसी तीसरे राष्ट्र या संयुक्तराष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों को टांग अड़ाने की जरूरत नहीं है। यह वही जुल्फिकारअली भुट्टो हैं, जो कहा करते थे कि यदि हमें हजार साल भी लड़ना पड़े तो हम लड़ेंगे और कश्मीर को भारत से लेकर रहेंगे। पाकिस्तान के शोध-संस्थानों और विश्वविद्यालयों में मेरे जब भी भाषण हुए मैंने श्रोताओं से पूछा क्या पाकिस्तान हजार साल में भी कश्मीर को भारत से छुड़ा सकता है?

तो सबकी बोलती बंद हो जाती थी। मुझे कई पाकिस्तानी कहते रहे कि कश्मीर हमारे लीडरों के लिए एक जबर्दस्त कश्ती है। जो लीडर इसे जितने जोर से दौड़ाता है, वह अपना चुनाव उतने ही जोर से जीतता है लेकिन पाकिस्तान की आज जो हालत हो गई है, उसमें कश्मीर-जैसा कोई मुद्दा रह ही नहीं गया है। पाकिस्तानी कश्मीरी ही नहीं, बलूच और पठान भी आजादी और अलगाव की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर न तो संयुक्तराष्ट्र संघ में कोई समर्थन मिल रहा है, और न ही अन्तरराष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में! इधर तुर्की और मलेशिया ने थोड़ी चिल्लपों जरूर मचाई थी लेकिन कश्मीर के सवाल को अब सउदी अरब और संयुक्त अरब अमारात ने भी खूंटी पर टांग रखा है।

बिलावल को अफसोस है कि फलस्तीन के मामले पर संयुक्तराष्ट्र संघ और महाशक्तियां कुछ न कुछ पहल करती रहती हैं लेकिन कश्मीर के मुद्दे पर ये सब चुप्पी खींचे रखते हैं। बिलावल ने भारत के बारे में बोलते हुए गलती से उसे अपना ‘मित्र’ और अपना पड़ौसी भी कह दिया। अफगानिस्तान के बारे में उसने ठीक ही कहा कि यदि अफगानिस्तान छींकता है तो पाकिस्तान को जुकाम हो जाता है। कश्मीर पर कब्जा करने के बदले पाकिस्तान को पहले तालिबानी जुकाम और आर्थिक बुखार की गोलियां खानी चाहिए।

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