चंडीगढ़, 3 दिसंबर। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नसबंदी ऑपरेशन के बाद गर्भवती हुई महिला को ब्याज सहित 30 हजार रुपये मुआवजा देने के प्रथम अपीलीय अदालत के फैसले को रद्द कर दिया है। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल ने फैसले में कहा कि सर्जरी से पहले महिला को इस बात से अवगत कराया गया था कि कई बार ऑपरेशन फेल हो जाता है। इसके लिए कोई भी चिकित्सा अधिकारी जिम्मेदार नहीं होगा।
महिला ने इस संबंध में एक फॉर्म पर हस्ताक्षर भी किये थे। ऐसे में हाई कोर्ट ने संगरूर ट्रायल कोर्ट के आदेश को बहाल कर दिया, जिसने महिला की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि वह डॉक्टर की लापरवाही साबित करने में विफल रही है। जस्टिस क्षेत्रपाल ने फैसले में कहा कि सिर्फ इस आधार पर चिकित्सीय लापरवाही नहीं मानी जा सकती कि ऑपरेशन से वांछित परिणाम नहीं मिला। हाई कोर्ट ने कहा कि सर्जन सर्जरी करने में सक्षम नहीं था या सर्जन ने लापरवाही बरती, ऐसी स्थिति में ही मुआवजे के लिए मुकदमा दायर किया जा सकता है।



