चंडीगढ़। पंजाब की मान सरकार ने बीते दिनों प्रदेश की पंचायतों को भंग करने के आदेश जारी किए। लेकिन अब यह मामला विवाद का रूप ले रहा है। क्योंकि पंजाब की AAP सरकार के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई है। वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने भी पंजाब सरकार के फैसले की निंदा की है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि AAP सरकार के फैसले से विकास कार्य प्रभावित होंगे। उन्होंने बताया कि लीगल सेल के चेयरमैन ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने इस फैसले को गैर संवैधानिक बताया है। साथ ही कोर्ट द्वारा इस फैसले को रद्द किए जाने की उम्मीद जताई।
पंजाब सरकार का चुनाव से पहले फैसला
गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने पंचायत चुनावों से पहले बीते शुक्रवार को प्रदेश की सभी पंचायतों को भंग करने के आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही वहां प्रबंधक भी लगा दिए गए। पंजाब में 13 हजार से ज्यादा पंचायतें हैं, जिनमें राज्य सरकार द्वारा अब चुनाव भी कराए जाएंगे। पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव 25 नवंबर को हो सकते हैं। वहीं ग्राम पंचायतों के चुनाव 31 दिसंबर को कराए जा सकते हैं। हालांकि सरकार की तरफ से अभी औपचारिक ऐलान होना बाकी है।
प्रबंधक नियुक्त किए जा रहे
पंजाब सरकार ने ग्राम पंचायतों को पंजाब पंचायती राज एक्ट 1994 की धारा 29-ए के अधीन कर भंग किया है। राज्य सरकार पंचायती रिकॉर्ड को सहेज व सुरक्षित रखने के लिए सामाजिक शिक्षा एवं पंचायत अफसर, पंचायत अफसर, जूनियर इंजीनियर और ग्रामीण विकास अफसर प्रबंधक नियुक्त किए गए हैं। इसके लिए प्रबंधकों को बीती 14 अगस्त तक ग्राम पंचायतों का बंटवारा कर पेन ड्राइव समेत सॉफ्ट कॉपी के माध्यम से प्रोफार्मा भेजने के आदेश जारी किए गए।



