Friday, June 19, 2026
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दिल्ली बम धमाकों का दोषी आतंकी भुल्लर की रिहाई पर सुनवाई- 2011 में मिली थी मौत की सजा

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सिख कैदियों की रिहाई सूची में दविंदर भुल्लर का भी नाम

अमृतसर। 1993 दिल्ली बम धमाकों के दोषी दविंदर पाल सिंह भुल्लर की तरफ से प्री-मैच्योर रिहाई की मांग पर अब सुनवाई 18 अक्टूबर को होगी। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर सजा रिव्यू बोर्ड ने बताया कि भुल्लर की मांग पर 4 सप्ताह के भीतर निर्णय ले लिया जाएगा। भुल्लर को टाडा कोर्ट ने बम धमाके के मामले में फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया था।

दविंदर पाल सिंह ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बताया कि उसे दिल्ली बम धमाके के मामले में दोषी करार देते हुए ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। फांसी की सजा को चुनौती देते हुए उसने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने राहत देते हुए उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली।

भुल्लर ने याचिका में कहा कि वह पिछले 27 साल से जेल में है। दिल्ली जेल मैनुअल के अनुसार प्री-मैच्योर रिलीज के लिए बिना किसी छूट के 14 वर्ष जेल में रहना जरूरी है और छूट के साथ 20 वर्ष जेल में रहना है।

दविंदर पाल सिंह भुल्लर 1993 में दिल्ली में हुए बम धमाकों का दोषी है। जिसे 2011 में मौत की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में देरी, सेहत कारणों के चलते, सिख संगठनों व शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रयासों के बाद भुल्लर की फांसी को उम्रकैद में बदल दिया था। भुल्लर पहले तिहाड़ जेल में बंद था, लेकिन 2015 में सिख कैदियों को पंजाब लाने के प्रयासों के बाद उसे 2015 में ही पंजाब की अमृतसर जेल में भेज दिया गया था।

गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष छूट देने के अपने फैसले के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 29 सितंबर, 2019 को दिल्ली के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में भुल्लर सहित आजीवन कारावास का सामना कर रहे आठ सिख कैदियों की जानकारी दी थी। केंद्र ने दिल्ली के मुख्य सचिव को भुल्लर की रिहाई के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था, लेकिन दिल्ली सरकार के सजा रिव्यू बोर्ड ने तिहाड़ जेल से दविंदर पाल सिंह भुल्लर की समयपूर्व रिहाई पर कोई निर्णय नहीं लिया। इसके चलते उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्री-मैच्योर रिहाई की गुहार लगाई है।

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