नई दिल्ली, 23 अक्टूबर | दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम (डीवी एक्ट) के तहत महिलाओं के सांझा घर में रहने के अधिकार पर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा के बैंच ने कहा कि यदि पत्नी स्वयं लाभकारी रोजगार में है, तो उसे संयुक्त ससुराल वाले घर से बेदखल किया जा सकता है, भले ही घर का मालिक कोई भी हो।
निर्णय का आधार
कोर्ट ने एक महिला की अपील यह कहते हुए खारिज कर दी कि वह एमबीए पढ़ी-लिखी और कामकाजी महिला है और सांझा घर से बेदखल कर उसकी मदद की जा रही है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 19 के तहत, पत्नी के संयुक्त घर में रहने का अधिकार तभी मान्यता प्राप्त है जब उसे कानूनी रूप से बेदखल किया गया हो और वैकल्पिक आवास (किराए के आवास सहित) दिया गया हो।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि अपीलकर्ता के बुजुर्ग ससुर का घर संयुक्त परिवार था और बुढ़ापे में उन्हें अपने घर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि महिला को बेघर नहीं किया गया है बल्कि किराए पर वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया गया है।



