बेंगलुरु, 1 नवंबर। भारत चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरने वाले देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है।अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत का चंद्रयान-3 सुरक्षित रूप से चंद्रमा की सतह पर उतरा और दुनीया भर में तारीफें लुटी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के द्वारा पता चला है की इस मिशन में परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल शामिल है। जिसके कारण मॉड्यूल को कई वर्षों तक चंद्रमा की परिक्रमा जारी रखने में सक्षम होगा, जिसके कारण रोवर की उम्र 3 से 6 महीने से बढ़कर अब कई वर्षों तक हो गई है।
चंद्रयान-3 की यात्रा तब शुरू हुई जब यह 23 अगस्त को चंद्रमा पर उतरा। एक सप्ताह पहले, 17 अगस्त को मॉड्यूल अंतरिक्ष यान से अलग हो गया था। परमाणु ऊर्जा की बदौलत, अब इसके प्रभावशाली दो से तीन वर्षों तक संचालित होने की उम्मीद है।
ISRO को इस मॉड्यूल के माध्यम से पृथ्वी से ही महत्वपूर्ण चंद्र डेटा प्राप्त होता रहेगा। चंद्र मिशन के दौरान, मॉड्यूल ने 1,696 किलोग्राम ईंधन ले गया, जिससे चंद्रयान को पांच पृथ्वी की कक्षाएं और छह चंद्र चक्र पूरे करने में मदद मिली।
परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने इस महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन में भारत के परमाणु क्षेत्र की भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया। इसरो अधिकारियों ने यह भी नोट किया कि प्रणोदन मॉड्यूल दो रेडियोआइसोटोप हीटिंग इकाइयों (आरएचयू) से सुसज्जित है, जो अंतरिक्ष यान के तापमान को नियंत्रित करने के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएचआरसी) द्वारा विकसित एक-वाट डिवाइस है।



