नई दिल्ली। देश की अदालतों में न्यायाधीशों की भारी कमी के कारण न्याय प्रक्रिया की धीमी गति के कारण लगातार बढ़ते मामलों के बोझ तले दबती जा रही है। और न्याय दिलाने की प्रक्रिया से विलंब हो रहा है।
आज एक कार्यक्रम से लौटने के बाद वरिष्ठ पत्रकार एवं नैशनल ह्यूमन राइटस सोशल जस्टिस फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अनवर अमृतसरी, कासमी, नदवी ने पत्रकारों द्वारा पूछे गये प्रश्नों का उत्तर देते हुए उक्त विचार व्यक्त किये।
मौलाना अमृतसरी ने आगे कहा कि अकेले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में ही 19 जजों की कमी है. वहां करीब 5 लाख केस पेंडिंग हैं, जिनमें हजारों केस 20 से 30 साल पुराने हैं। देश की अन्य अदालतों में भी यही स्थिति है।
इस संबंध में 25 मार्च 2021 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश माननीय शरद अरविंद बोबडे ने कहा था कि देश की अदालतों में लंबित मामले नियंत्रण से बाहर हो गए हैं। ऐसे में कॉलेजियम की सिफारिशों के बावजूद जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में केंद्र सरकार के कथित ढुलमुल रवैये के खिलाफ न्याय पालिका रोष व्यक्त कर रही है। स्थिति से बचने के लिए और पीडि़तों को समय पर न्याय और दोषियों को त्वरित सजा सुनिश्चित करने के लिए, अदालतों में न्यायाधीशों की कमी को अविलंब दूर करने की आवश्यकता है ,क्योंकि विलंबित न्याय, न्याय न मिलने के बराबर है।



