Saturday, April 11, 2026
No menu items!
Google search engine

मन में क्या है कुछ बताते नहीं, हक़ हम पर तुम क्यों जताते नहीं

Spread the News

मन में क्या है कुछ बताते नहीं,
हक़ हम पर तुम क्यों जताते नहीं।

जो कुछ भी दिल में बता दो हमें,
बातें खुल कर क्यों सुनाते नहीं।

पूछने की कोशिश विफल हो गई,
आँसू की नदिया रुलाते नहीं।

किन मुद्दों पर यूँ ख़फ़ा हो अभी,
आँसू आँखों से बहाते नहीं।

कोई हम सा हमदर्द ही नहीं,
दर्द ए दिल को यूँ छुपाते नही।

भावों को मुख़ पर जता दो कभी,
यूँ हरगिज नाहक सताते नहीं।

मनसीरत कुछ भी कहे मानो जरा,
वादें मन से यूँ क्यों निभाते नहीं।
*********
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैंथल)

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments