Saturday, April 18, 2026
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क्षति तथा नुक़सान को सीमित करना है तो आपदा प्रबंधन की जानकारी देना बहुत जरूरी : प्रियंका पूनिया

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पंचकूला ( प्रीति धारा) । आज पाई एकेडमी सेक्टर 12 में आयोजित आपदा प्रबंधन की कार्यशाला में छात्रों को संबोधित करते हुए पाई अकैडमी की संस्थापक तथा प्रसिद्ध शिक्षाविद श्रीमति प्रियंका पूनिया ने बच्चों को आपदा प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। जिस तरह से आस पास के इलाकों में बाढ़ के आसार बने हुए हैं इस समय पर छात्रों को आपदा प्रबंधन के बारे में जानकारी होना अति आवश्यक है । श्रीमती पुनिया ने छात्रों को बताया कि 2006 में आपदा प्रबंधन अधिनियम पारित हुआ ।इसका उद्देश्य था आपदा के समय कुशल प्रबंधन करना ताकि क्षति तथा नुक़सान को सीमित किया जा सके ।आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष का गठन भी किया गया है ।हमारे देश में बहुत सी ऐसी आपदाएँ हैं जो तबाही लेकर आती है।

भारतीय तथा राज्य सरकारों को व्यापक स्तर पर तैयारी करने की ज़रूरत है ।श्रीमती पूनिया ने बताया भारत सरकार सहित राज्य सरकार व जिला स्तर के अधिकारियों को यह शक्ति मिलती है कि वे आपदा प्रबंधन और उसके प्रभाव को कम करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया और सभी नागरिक सहित उस प्रभाव के क्षेत्र के लोगों को आदेश जारी करें । आपदा दो प्रकार की हो सकती है या तो प्राकृतिक आपदा या फिर मानवजनित आपदाएँ परंतु यह एक्ट दोनों ही तरह की आपदाओं पर लागू होता है।

श्रीमती पूनिया ने बच्चों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्था यानी एनडीएम तथा राज्य आपदा प्रबंधन संस्था सीडीएमए में फ़र्क बताते हुए उनकी कार्यप्रणाली को समझाया । इसके साथ उन्होंने इसके साथ ही उन्होंने जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन का ज़िक्र करते हुए डीडीएम के बारे में बच्चों को जानकारी दी। श्रीमती पुनिया ने आपदा प्रबंधन के चार चरणों का वर्णन करते हुए कहा कि इसमें शमन जो के पूर्व आपदा प्रबंधन के रूप में संदर्भित किया जाता है जिसमें आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए उपाय शामिल है ये है बहुत ही आवश्यक चरण है तथा इस चरण पर कार्य किए जाने इसके साथ ही उन्होंने बताया कि किस तरह तैयारी में उन्हें उस संप्रदाय तक पहुँचना शिक्षित करना और आपात आपदा की स्थिति में बचाओ से उबरने के लिए प्रशिक्षण दिया दिया जाता है ।

प्रतिक्रिया का ज़िक्र करते हुए उन्होंने आस पास के इलाकों यमुनानगर और अंबाला का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस तरह से गाँव में एनडीआरएफ़और एएसडीआरएफ़ काम कर रही है यह प्रतिक्रिया का उदाहरण है ।इसमें जीवन बचाने तथा मानवीय ज़रूरतों को पूरा करने और सफ़ाई प्रक्रिया को पूरा करने पर ज़ोर दिया जाता है ।अंतिम चरण के बारे में बताते हुए उन्होंने इसके बाद उन्होंने बताया कि किस तरह रिकवरी जो आपदा प्रबंधन का अंतिम चरण है जो के समुदाय को बहाल करने तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को सामान्य करने के लिए उत्तरदायी तो उत्तरदायी होता है। श्रीमती पूनिया ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एनडीआरएफ़ तथा राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एसडीआरएफ़ किस तरह से आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है उन्होंने यहाँ पर है एनडीआरएफ़ तथा एसडीआरएफ़ की टीम की सराहना करते हुए कहा कि कैसे ये लोग लोगों की जान बचाते हैं ।

उनके अनुसार समय समय पर इन लोगों को का आत्मबल तथा मनोबल भी बढ़ाते रहने की आवश्यकता है ।बाढ़ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बाढ़ आपदा प्रबंधन के कुछ मुख्य क़दम है बाढ़ का पूर्वानुमान करना, अफवाह को कम करना,बांधों का निर्माण और अवरोधन का निर्माण बाढ़ के स्तर को कम करना बाढ़ के बचाओ यानी तटबंधों का निर्माण करना ।हरियाणा के बारे में ज़िक्र करते हुए श्रीमती पूनिया ने बच्चों को बताया कि हरियाणा में कई बार विनाशकारी बाढ़ आ सकती है आ चुकी है उन्होंने कहा कि उन्हें 1977,1978 ,1980, 1983 ,1988, 1993 ,1995 ,1996 में हरियाणा में विनाशकारी बाढ़ आ चुकी है |

हरियाणा में बाढ़ की वजह है कि चारों ओर दिल्ली रोहतक हिसार साइड से एक डिप्रेशन तश्तरी आकार क्षेत्र में आता है जिससे इसकी भौगोलिक स्थिति के रूप में कुछ प्राकृतिक कारणों से हो सकता है और यह एक ग़रीब प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था है ।और कभी कभी भारी वर्षा एक प्रमुख योगदान होता है । श्रीमती पुनिया के अनुसार बच्चों को ऐसे समय में जब चारों तरफ़ से वो बाढ़ के बारे में सुन रहे है,उन्हें आपदा प्रबंधन की जानकारी देनी अति आवश्यक है ।

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