Saturday, April 18, 2026
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ना कोई छल था, ना कोई कपट था। दोस्ती अमीर थी। ना कभी गरीब थी।

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????ज़िक्र ऐ दोस्ती????

????ना कसमें थी।
????ना वादे थे। 
????ना शिकवे थे। 
????ना कोई गिले थे।

???? ना कोई छल था। 
???? ना कोई कपट था।
????दोस्ती अमीर थी।
????ना कभी गरीब थी।

????हर पल चहकती थीं।
????फूलो सी महकती थी।
????सावन की बूंदों जैसी थी
????कभी कभी मिला करती थी।

⚘उसमें मीठी यादें थी।
⚘कभी ना दिल से जाती थी।
⚘सालों बाद मिलती थी।
⚘घंटों बातें होती थीं।

 एकता सिंह (दिल्ली )


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