Sunday, September 20, 2026
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भोले भाले लोगों का जमघट है, साफ सुथरे जल का पनघट है

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  • *फूलों सा सुन्दर गांव मेरा है*

    *********

  • जहां पशु पक्षियों का बसेरा है,

    फूलों सा सुन्दर गांव मेरा हैं।

  • कोयल मधुरिम गान सुनाती है,

    जहां पुरवाई सुहानी आती है,

    शुद्ध वायु भरा उगता सवेरा है।

    फूलों सा सुन्दर गांव मेरा है।

  • भोले भाले लोगों का जमघट है,

    साफ सुथरे जल का पनघट है,

    साधु संतो का बगल में डेरा है।

    फूलों सा सुन्दर गांव मेरा है।

  • भाई चारा जिंदाबाद जहां,

    सुख शांति खुशी खुशहाली वहां,

    जहां छू पाता नहीं अंधेरा है।

    फूलों सा सुन्दर गांव मेरा है।

  • गोरी गौरी खेले गलियों में,

    घुंगरूं बाजे बैलों की टलियो में,

    खुद ईश्वर का जहां पर फेरा है।

    फूलों सा सुन्दर गांव मेरा है।

  • फल फूलों भरी क्यारी न्यारी,

    भू को छूती है अंबिया की डारी,

    नभ ने इंद्रधनुषी रंग बिखेरा है।

    फूलों सा सुन्दर गांव मेरा है।

  • मनसीरत खुश्बू भरी है मिट्टी में,

    शहरी बातें लिखते यही चिट्ठी में,

    जुड़ता कुनबा सारा बहुतेरा है।

    फूलों सा सुन्दर गांव मेरा है।

  • जहां पशु पक्षियों का बसेरा है।

    फूलों सा सुन्दर गांव मेरा हैं।

    *********

    सुखविंद्र सिंह मनसीरत

    खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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