Wednesday, April 15, 2026
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स्कूल की प्रिंसीपल बनी मिसाल, विद्यालय की देखरख कर बीता रही अपनी छुट्टियां…

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कन्नौज। गर्मियों की छुट्टियों में सभी सरकारी स्कूल बंद हो जाते हैं शिक्षक और शिक्षिकाएं छुट्टियां मनाने अपने परिजनों के साथ दूरदराज क्षेत्रों में जाते हैं। ऐसे में कन्नौज जिले के छिबरामऊ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में तैनात एक महिला अध्यापिका विद्यालय को ही अपना घर और अपना सबकुछ मान चुकी है।

छुट्टी होने के बावजूद महिला टीचर अपने विद्यालय का ध्यान रखती है। वहां पर लगे पेड़ पौधों को रोज पानी देती है विद्यालय में साफ-सफाई का भी वे स्वयं ध्यान रखती है। अपने विद्यालय के प्रति पूर्ण समर्पण महिला टीचर को जिले में चर्चित कर रहा है।

छिबरामऊ क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय कुँवर पुर बनवारी है यहां पर तैनात प्राचार्य सुमन लता यादव अपने कार्यों से हमेशा से चर्चा में रहती हैं। सुमन लता यहां पर काफी समय से प्राचार्य के पद पर हैं और विद्यालय में जिस तरह की व्यवस्था है सुमनलता ने अपने निजी संसाधनों से कर रखी है। विद्यालय के चारों तरफ खूबसूरत पेड़ों की कतार है और विद्यालय में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।

प्राथमिक विद्यालय कुंवरपुर बनवारी की प्राचार्य सुमनलता यादव अब तक कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी है। उन्हें प्रदेश सरकार द्वारा महारानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार भी मिल चुका है। जिले की आदर्श शिक्षिका के साथ ही स्काउट गाइड में भी उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

विद्यालय में तैनात प्राचार्य सुमन लता यादव अपनी सारी छुट्टियां विद्यालय की ही देखभाल में बिता रही है। सुमनलता प्रतिदिन विद्यालय में लगे पेड़ पौधों को पानी देने जाती हैं, ताकि भीषण गर्मी में वह सूख ना जाए विद्यालय में साफ-सफाई का भी स्वयं विशेष ध्यान रखती हैं। सुमन लता बिल्कुल अपने घर की तरह ही अपने विद्यालय का भी ध्यान रखती है क्योंकि विद्यालय विद्या का मंदिर होता हैं।

प्राचार्य सुमन लता यादव बताती है कि विद्यालय की देखभाल करना उनको अच्छा लगता है। विद्यालय में पेड़ पौधे की वह देखभाल खुद करती हैं। क्योंकि विद्यालय में छुट्टियां होने के बाद कोई भी यहा नहीं आता इसके बाद मेरा अपना दायित्व और ज्यादा बढ़ जाता है, कि विद्यालय की देखभाल की जाए और मुझे यह बहुत अच्छा भी लगता है।

विद्यालय में हर तरह की सुविधाएं मौजूद है और आने वाले समय में मैं हमेशा यही प्रयास करती रहती हूँ कि विद्यालय में आने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा और अच्छा माहौल मिल सके। जिससे उनके शारीरिक विकास के साथ उनके मानसिक विकास भी हो सके।

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