Friday, April 17, 2026
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भारत की स्वतंत्रता संग्राम में उलमा की अमर भूमिका: मुफ़्ती वसीम अकरम क़ासमी

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संगरूर,17 अगस्त।   पंजाब के शहर संगरूर में स्थित मदनी मदरसा में राष्ट्रीय झंडारोपण का आयोजन किया गया। इस शुभ अवसर पर मदरसा विधार्थियों को संबोधित करते हुए मदरसे के नाज़िम मुफ़्ती वसीम अकरम क़ासमी ने कहा कि भारत की मिट्टी में आजादी की जड़ें इतनी गहरी हैं कि वे अनगिनत नायकों के खून से सींची गई हैं।

इनमें से एक महत्वपूर्ण धारा है उलमा की—वे विद्वान जो न केवल धार्मिक ज्ञान के संरक्षक थे, बल्कि स्वतंत्रता की ज्वाला को प्रज्वलित करने वाले योद्धा भी। 1857 की सातवीं जंग-ए-आजादी से लेकर 15 अगस्त 1947 की स्वर्णिम सुबह तक, उलमा ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनकी कहानी साहस, बलिदान और एकता की मिसाल है, जो इतिहास के पन्नों में चमकती है, पर अक्सर अनकही रह जाती है।

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