Friday, April 10, 2026
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‘सिरजणा केंद्र’ द्वारा आयोजित ग़ज़ल कार्यशाला ने छोड़ी विशेष छाप… कंवर इकबाल सिंह, शहबाज़ ख़ान

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कपूरथला,8 मई। साहित्य की लोकप्रिय विधा ग़ज़ल लेखन की कला पर सिरजणा केंद्र (रजि.) द्वारा विश्व प्रसिद्ध ग़ज़लकार, गीतकार और प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ‘सूल सुराही’ के मुख्य संपादक बलबीर सिंह सैनी निवासी नंगल के साथ रूबरू और ग़ज़ल कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बलबीर सिंह सैनी और विशेष अतिथि के रूप में उस्ताद ग़ज़लकार सुरजीत साजन ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिरजणा केंद्र के प्रधान कंवर इकबाल सिंह और ग़ज़लकार जनकप्रीत सिंह बेगोवाल ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत में महासचिव शहबाज़ ख़ान ने सभी का स्वागत करते हुए बलबीर सिंह सैनी के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी और उपस्थित शायरों का एक छोटा काव्य दरबार आयोजित किया। इस प्रारंभिक काव्य दरबार में दलजीत महिमी, लाली करतारपुरी, डॉ. सुरिंदरपाल सिंह, कॉमरेड हरचरण सिंह और सुखदेव सिंह भट्टी फिरोज़पुरी ने अपनी रचनाओं से माहौल को साहित्यिक रंगत दी।

स्वागत भाषण में केंद्र के प्रधान कंवर इकबाल सिंह ने औपचारिक रूप से सभी का स्वागत किया और मुख्य अतिथि बलबीर सिंह सैनी के साहित्यिक सफर और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इसके बाद बलबीर सिंह सैनी ने अपने साहित्यिक जीवन, उपलब्धियों और ग़ज़ल की शुरुआत पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने उपस्थित शायरों को ग़ज़ल लेखन की सुंदर कला से जुड़े कई अहम बिंदुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि कोई भी रचना तब तक ग़ज़ल नहीं मानी जा सकती जब तक उसका विषय सार्थक न हो। उन्होंने पिंगल और अरूज़ जैसे ग़ज़ल के शिल्पगत औज़ारों का हवाला देते हुए कहा कि यदि रचना छंदबद्ध और सिद्धांतों पर खरी नहीं उतरती, तो उसे ग़ज़ल नहीं कहा जा सकता।

इसके पश्चात उपस्थित शायरों ने मुख्य अतिथि से ग़ज़ल रचना से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी पूछे। विशेष अतिथि सुरजीत साजन ने ग़ज़ल की बारीकियों पर चर्चा करते हुए कहा कि एक ग़ज़लकार अपने शब्दों के ज़रिए अपनी गंभीर सोच और कला को पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शायर जनकप्रीत सिंह बेगोवाल ने भी ग़ज़ल और अरूज़ के नियमों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की और कहा कि काफ़िया, रदीफ़ और बहर के आधार पर ही एक मुकम्मल ग़ज़ल लिखी जा सकती है, जिसके लिए निरंतर अभ्यास और साहित्यिक ज्ञान की आवश्यकता होती है।

प्रिंसिपल डाक्टर हरप्रीत सिंह हुंदल ने पूरे कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र का यह प्रयास प्रशंसनीय है कि ऐसी कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिससे शायर अपनी लेखन कला में और निखार ला सकें। ऐसी गतिविधियाँ न केवल वरिष्ठ लेखकों और कवियों के लिए, बल्कि युवा शायरों के लिए भी नए रास्ते खोलेंगी, जिसके लिए सिरजणा केंद्र की पूरी टीम बधाई की पात्र है।

प्रो. कुलवंत सिंह औजला ने कहा कि बलबीर सिंह सैनी जैसे बुद्धिजीवी जहाँ हमारे साहित्यिक जगत के लिए प्रकाशस्तंभ हैं, वहीं उनका कपूरथला ज़िले में आगमन हमारे लिए गर्व और खुशी की बात है।

कार्यक्रम के अंत में सिरजणा केंद्र की प्रबंधन टीम ने मुख्य अतिथि बलबीर सिंह सैनी को सम्मानित किया। इस अवसर पर वरिष्ठ मीत प्रधान आशु कुमार, मीत प्रधान और वित्त सचिव मलकित सिंह मीत, अवतार सिंह भंडाल, अवतार सिंह गिल, प्रिं. सर्वन सिंह पर्देसी, सुरिंदर सिंह शेखूपुर, महिंदर सिंह, कुलवंत सिंह धनझू, डॉ. हरभजन सिंह, तेजबीर सिंह, जसप्रीत सिंह धिंजन, गुरविंदर सिंह, रुपिंदर सिंह, सहायक मीडिया इंचार्ज रजनी वालिया, हरजिंदर सिंह, संदीप सिंह, गुरदीप गिल, नेशनल अवॉर्डी मंगल सिंह भंडाल, अनिल कुमार और रणजीत सिंह आदि उपस्थित थे।

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