दिल्ली, 26 फरवरी | गुजरात के बेट द्वारका व ओखा के बीच सुदर्शन सेतु का निर्माण देश के प्रधानमंत्री कि सनातनी परंपरा के प्रति समर्पण को दर्शाता है बल्कि बारह हज़ार आबादी बाले आइलैंड पर बसे के लोगों के लिए बहुत बड़ी सौगात है। साथ ही पड़ोसी देश के सहयोग से हो रही वहां पर संदिग्ध गतिविधियों में लगाम लगाने में बहुत सार्थक होगा वहीं अब कृष्ण जी के नगरी में श्रद्धालुओं के लिए पहुंच में बड़ी सहायक होगी।
यह हमारे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का एक और नायाब नमूना तैयार हुआ है और देश का सबसे लंबा ब्रिज सुदर्शन सेतु बना है। लम्बे समय से अपने परम इच्छा व देश कि धरोहर तक पहुंच मंशा को साकार के मद्देनजर इस ब्रिज को रविवार को पीएम मोदी ने गुजरात के द्वारका में राष्ट्र को समर्पित किया है, यह ब्रिज 2.32 किलोमीटर लंबा है। सुदर्शन सेतु के निर्माण से पहले, तीर्थयात्रियों को भेट द्वारका तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। उन्हें नाव पर निर्भर रहना पड़ता था। मौसम खराब हो तो लोगों को प्रतीक्षा करनी होती थी। अब इस ब्रिज के बन जाने से देवभूमि द्वारका के प्रमुख पर्यटक आकर्षण के रुप में भी काम करेगा।
बेट द्वारका को भेंट द्वारका भी कहा जाता है, माना जाता है कि यही वो जगह है जहां श्रीकृष्ण से मिलने सुदामा आए थे। इस आइलैंड की आबादी 12,000 है जिनमें से 80% यानी करीब 9,500 मुसलमान हैं। कुछ साल पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बेट द्वारका के दो आइलैंड पर अपना दावा जताया था। इस पर गुजरात हाईकोर्ट ने पूछा था कि कृष्ण नगरी पर आप कैसे दावा कर सकते हैं और याचिका खारिज कर दी थी। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने जामनगर जिले को विभाजित करके अगस्त 2013 में देवभूमि द्वारका को एक नया जिला बनाने की घोषणा की थी। ऐसा कहा जाता है कि बंदरगाह शहर 10,000 साल पहले जलमग्न होने से पहले फला-फूला करता था। कृष्ण के मथुरा से द्वारका प्रवास का यह पौराणिक वृत्तांत गुजरात की संस्कृति से निकटता से जुड़ा हुआ है। इसमें कोई संदेह नहीं कि सरकार के उपलब्धियों में से यह एक होगी वहीं देश वासियों के लिए बहुत बड़ी सौगात है ।



