चंडीगढ़। पंजाब में हर महीने 300 क्यूबिक मीटर से ज्यादा भूजल का दुरूपयोग करने वालों को 4 रुपये से 22 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर जुर्माना देना होगा। यह नियम आज एक फरवरी से लागू हो गया है। इस संबंध में जिला उद्योग केन्द्रों ने उद्योग संचालकों के सभी संगठनों को अधिसूचना की प्रति भेज दी है। अब सभी फैक्ट्री संचालकों, व्यापारियों, पानी के टैंकरों और बिजली के नलकूप मालिकों को प्राधिकरण के अधीन जमीन से पानी निकालने की अनुमति लेनी होगी।
सभी जिलों के 153 प्रखंडों को ग्रीन, येलो और ऑरेंज जोन में बांटा गया है. इनमें से सबसे खतरनाक (निम्न जल स्तर) येलो जोन के 54 ब्लॉक हैं। इनमें 200 फीसदी तक पानी निकाला जा चुका है, जबकि ग्रीन जोन में 36 ब्लॉक (करीब क्रिटिकल) और 64 ब्लॉक ऑरेंज जोन में हैं, जहां 200 फीसदी से ज्यादा पानी निकाला गया है. 300 क्यूबिक मीटर से अधिक भूजल का उपयोग करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा, उनकी कमाई का एक हिस्सा जलापूर्ति व्यवस्था की सुविधा पर खर्च किया जाएगा।
अपशिष्ट जल को दिशा-निर्देशों के अनुसार उपचारित किया जाना है। इसके जरिए सरकार उन लोगों से वाटर क्रेडिट वसूलेगी जो यह काम करेंगे। पंजाब जल विनियमन और विकास प्राधिकरण के तहत भूजल निष्कर्षण और संरक्षण के लिए पंजाब दिशानिर्देश 2020 नियम लागू हो गए हैं। प्राधिकरण के सचिव जेके जैन ने कहा कि घरेलू और कृषि क्षेत्रों को पूरी तरह से छूट दी गई है।



