चंडीगढ़। बीते माह हथियारों और ड्रग्स की तस्करी में पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा गिरफ्तार किए गए छह भारतीय युवाओं में से दो के परिजनों ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। 24 साल के दो युवाओं रतनपाल सिंह और हरविंदर सिंह के परिजनों ने केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश और बीएसएफ अधिकारियों से संपर्क किया है।
परिजनों का कहना है कि दोनों युवक साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और रेत टिपर चालक के रूप में काम करते हैं। दोनों शादीशुदा हैं और उनके दो-दो बेटे हैं। कथित तौर पर उनके खिलाफ भारत में भी नशीली दवाओं के व्यापार का कोई मामला दर्ज नहीं है।
परिवारों ने कहा है कि वे हरविंदर की चचेरी बहन की मदद करने गए थे क्योंकि फिरोजपुर के चांदीवाला गांव में उसका घर बाढ़ में डूब गया था। परिजनों ने अपने बेटों के बाढ़ के पानी में बह जाने के वीडियो दिखाते हुए कहा कि वे 27 जुलाई को पाकिस्तान की ओर आई बाढ़ में बह गए थे और अब उन पर झूठे आरोप लगाए गए हैं।
उन्होंने नशीली दवाओं के किसी भी व्यापार में अपनी संलिप्तता से पूरी तरह इनकार किया है। रतनपाल जालंधर के मेहतपुर के पास खेहरा मश्तरकन गांव के रहने वाले हैं, जबकि हरविंदर लुधियाना के जगरांव तहसील में पड़ने वाले शेरेपुर गांव के रहने वाले हैं।
अपने भाई के बेटे रतनपाल को गोद लेने वाले करतार सिंह ने कहा कि अगले दिन हमें पता चला कि हमारा बेटा पाकिस्तान की ओर बह गया है। हमें इसके बारे में तब पता चला जब स्थानीय पुलिस ने हमें जानकारी दी। उन्होंने हमारे बेटे की सारी जानकारी और दस्तावेज भी छीन लिए। बाद में हमें बताया गया कि रेंजर्स उसे 2 अगस्त को हमें सौंप देंगे।
हमें उस दिन फिरोजपुर सीमा पर बुलाया गया था। हम घंटों इंतजार करते रहे लेकिन बाद में बताया गया कि अभी उन्हें हमें नहीं सौंपा जाएगा। हरविंदर के पिता मुख्तियार सिंह ने कहा कि मैंने मदद के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश और बीएसएफ के अधिकारियों से मुलाकात की है, लेकिन कोई भी हमें यह आश्वासन नहीं दे रहा है कि हम उन्हें कब वापस ला पाएंगे। सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।



