पटियाला, 15 जनवरी | पंजाब सरकार ने साल 2007 से 2017 तक हुए बिजली समझौतों की जांच शुरू कर दी है। इस जांच में थर्मल पावर प्लांट और सोलर एनर्जी पावर प्लांट से जुड़े सभी समझौतों की गहन पड़ताल की जाएगी।
विजिलेंस ब्यूरो को सौंपे गए रिकॉर्ड की जांच तकनीकी माहिरों द्वारा की जा रही है। अगर इसमें कोई खामियां या अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो उनसे जुड़े लोगों से पूछताछ की जाएगी। जांच में अकाली-भाजपा सरकार और उस समय के अधिकारियों पर भी नजर रहेगी।
इस पहल का उद्देश्य राज्य में बिजली खरीद में पारदर्शिता लाना और जनता के हितों की रक्षा करना है। सरकार का कहना है कि पिछली सरकारों के दौरान हुए कुछ समझौतों में संभावित अनियमितताएं पाई जा सकती हैं, जिनकी जांच जरूरी है।
जांच का मुख्य फोकस 1980 मेगावॉट के तलवंडी साबों थर्मल प्लांट और 1400 मेगावॉट के राजपुरा थर्मल प्लांट से जुड़े समझौतों पर रहेगा। इसके अलावा, सोलर एनर्जी से जुड़े 884 मेगावॉट के 91 समझौतों की भी जांच की जाएगी। इन समझौतों में बिजली खरीदने की दर 3.01 रुपए से 8.74 रुपए प्रति यूनिट तक थी, जो काफी ऊंची मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले कुछ समय में घोषणा की थी कि पिछली सरकारों के दौरान हुए बिजली समझौतों की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा था कि कुछ नेताओं ने बड़े स्तर पर अनियमितताएं की हैं, जिन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस जांच के परिणामों का इंतजार किया जा रहा है। उम्मीद है कि इससे राज्य में बिजली सेक्टर में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।



