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ऑनलाइन ट्रैफिक चालान भुगतने की प्रक्रिया-वाहन चालकों में मची हाहाकार

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जालंधर ,4 जून। आर.टी.ओ. कार्यालय में ऑनलाइन ट्रैफिक चालान भुगतने की प्रक्रिया आम जनता के लिए समय की बर्बादी और मानसिक परेशानी का सबब बन चुकी है। अब जबकि ऑफलाइन चालानों का भुगतान सीधे कोर्ट प्लेटफॉर्म पर जाकर करने की व्यवस्था लागू हो चुकी है, इसके बावजूद चालानों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया में आर.टी.ओ. कार्यालय में भीड़ कम नहीं हो रही है। मंगलवार को भी आर.टी.ओ. कार्यालय में चालान भुगतने आए लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली।

ऑफलाइन चालान भुगतने की प्रक्रिया में सबसे पहले वाहन मालिक या चालक को आर.टी.ओ. कार्यालय में दस्तावेजों की वेरिफिकेशन करवानी पड़ती है। इसके लिए आवेदकों को कार्यालय में कतार में खड़ा रहकर अपनी बारी का इंतजार करना होता है। हालांकि स्थिति यह रही कि एक-एक करके लोगों को दफ्तर के अंदर भेजा जा रहा था और जब तक पहले व्यक्ति का काम खत्म नहीं होता, दूसरे को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। इससे लोगों को कई-कई घंटे कतार में खड़े रहना पड़ा।

चालान भुगतने आए लोगों का कहना था कि जब ट्रैफिक नियम तोड़ने पर उन्हें चालान भुगतना ही है तो सरकार को यह प्रक्रिया इतनी कठिन और समय लेने वाली क्यों रखनी चाहिए? क्या ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हो सकती जिसमें लोग अपने दस्तावेजों को ऑनलाइन वैरीफाई करवा सकें और घर बैठे चालान का भुगतान कर सकें? कई लोगों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि एक छोटे से चालान को निपटाने के लिए उन्हें पूरा दिन बर्बाद करना पड़ता है।

पिछले लंबे समय से आरटीओ कार्यालयों में एजैंटों का बोलबाला रहा है, जो लोगों से मोटी फीस लेकर उनके चालान भुगता देते थे। जिसको देखते हुए पूर्व आर.टी.ओ. बलबीर राज सिंह ने बरसों से चली आ रही व्यवस्था बदला, जिसके तहत जिला में हुए करीब 35500 ऑफलाइन चालान सीधे कोर्ट में भेज दिए गए और रोजाना आने वाले चालानों को भी इसी प्रक्रिया के तहत कोर्ट में भेजा जाने लगा है। अब जबकि आफलाइन चालानों की ए.आर.टी.ओ. स्तर पर ही दस्तावेजों की वेरिफिकेशन की जा रही है और एजैंटों की भूमिका खत्म कर दी गई है, इससे पारदर्शिता तो बढ़ी है, लेकिन इसके चलते आम लोगों को अतिरिक्त समय लगने लगा है।

इस बारे में जब ए.आर.टी.ओ. विशाल गोयल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ऑफलाइन चालानों के मामले में दस्तावेजों की वेरिफिकेशन अनिवार्य होती है। उन्होंने कहा कि यह कार्य किसी सामान्य कर्मचारी की आईडी से नहीं किया जा सकता, इसलिए यह काम उन्हें स्वयं करना पड़ता है। ए.आर.टी.ओ. ने बताया कि कई बार लोग चालान भुगतने के लिए एजैंटों का सहारा लेते हैं और उनके माध्यम से ठगी का शिकार बन जाते हैं। इसी कारण यह सुनिश्चित किया गया है कि चालान भुगतने के लिए वही व्यक्ति आए जिसके नाम पर चालान किया गया है या फिर संबंधित वाहन मालिक स्वयं आए। उन्होंने कहा कि हर चालान को एक-एक करके वैरीफाई किया जाता है और इसमें समय लगता है, परंतु इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल पारदर्शिता सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि फर्जी चालान भुगतने की कोशिशों को रोकना भी है।

भाजपा नेता सचिन सरीन ने इस मामले पर कहा कि ऑफलाइन चालान भुगतने को लेकर वैरिफिकेशन के काम को लेकर एक जगह भीड़ एकत्रित करने की बजाय, इस काम को ट्रैफिक चालान करने वाले संबंधित थाने के अधिकारी द्वारा करके चालान के जुर्माना का भुगतान करने की व्यवस्था की जाए। सचिन सरीन ने कहा कि अगर सरकार इस प्रणाली को लागू कर दे तो उससे जहां वैरिफिकेशन का काम कई हिस्सों में बंट जाएगा, वहीं लोगों को दूरदराज के क्षेत्रों से आर.टी.ओ. कार्यालय तक आने को लेकर जो समय की बर्बादी और परेशानियां झेलनी पड़ती है, इससे निजात मिल जाएगी

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