Wednesday, September 30, 2026
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74वें गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘हक की आवाज़’ ट्रस्ट की ओर से लुधियाना में किया गया सम्मान समारोह का आयोजन

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निहाल अख़्तर प्यामी और शाहनवाज़ बेबाक पंजाब के शाही इमाम मौलाना उस्मान रहमानी लुधियानवी के हाथों PEACE AWARD से सम्मानित किए गए

लुधियाना ।  मॉडल कालोनी में ‘हक़ की आवाज़ ट्रस्ट’ की ओर से 74वें गणतंत्र दिवस के मुबारक मौके पर परचम कुशाई यानी झंडात्तोलन किया गया। यह मुबारक काम पंजाब के शाही इमाम मौलाना उस्मान रहमानी लुधियानवी के हाथों किया गया जिसमें सभी धर्मों के लोग शिरकत की। इस मौके पर अपने भाषण में मौलाना उस्मान लुधियानवी ने कहा कि इस मुल्क की आज़ादी में सभों ने बराबर हिस्सा लिया। मुल्क के लिए शहीद होने की बारी आई तो किसी ने खुशी खुशी शहादत का जाम पिया।
उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी के बाद बाबा साहब डाॅक्टर भीमराव अम्बेडकर जी ने जो संविधान दिया वह सबके लिए एक सा है, उसमें किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं, इसलिए अगर आज कोई धर्म की बुनियाद पर लोगों को बांटने का काम करे तो वह सुन ले यह हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं, सबका खून शामिल है यहां की मिट्टी में।
वहीं सीमांचल से लुधियाना के दौरे पर आए ‘गांव मोहल्ला’ चैनल के संचालक निहाल अख़्तर प्यामी ने कहा कि मुल्क को बचाने के लिए इसका संविधान बचाना जरूरी है। संविधान बचाने के लिए अपने बच्चों को, अपने बड़ों को, बुजुर्गों को शिक्षित करना ज़रुरी है। जब तक वो शिक्षित नहीं होंगे तबतक संविधान की अहमियत को समझ नहीं पाएंगे।

वहीं सीमांचल से ही आए शाहनवाज बेबाक ने भी पुरज़ोर तरीके से अपने ख़यालात का इजहार किया। 74वें गणतंत्र दिवस के इस मुबारक मौके पर मीडिया के क्षेत्र में शानदार कारकरदगी के लिए निहाल अख़्तर प्यामी और शाहनवाज़ बेबाक पंजाब के शाही इमाम मौलाना उस्मान रहमानी लुधियानवी के हाथों PEACE AWARD से सम्मानित किए गए।
प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए ‘हक की आवाज़’ ट्रस्ट के चेयरमैन सज्जाद आलम ने सभों का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।
आपको बताते चलें कि ‘हक की आवाज़’ ट्रस्ट पिछले तीन साल से अवामी खिदमात के काम में जुटी हुई है। लाॅकडाउन के दौरान इस ट्रस्ट के ज़रिए हज़ारों प्रवासियों, ज़रूरतमंदों के बीच राहत कार्य किए गए थे. किसान आंदोलन में भी इस ट्रस्ट ने अहम भूमिका निभाई थी। अपने जायज हकूक के लिए आन्दोलन कर रहे देश के किसानों को हक की आवाज़ ट्रस्ट ने ना केवल समर्थन दिया, बल्कि उनके लिए पंजाब से दिल्ली तक साथ खड़े रहे. यह ट्रस्ट प्रवासी मजदूरों के साथ हमेशा कदम से कदम मिलाकर साथ खड़ी रहती है।

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