नई दिल्ली , 5 अक्टूबर । वर्तमान समय में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आम लोगों से लेकर सैलिब्रिटीज़ तक हार्ट अटैक की वजह से जान गंवा रहे हैं। पिछले कई सालों में यह खतरनाक ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। गलत लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खान-पान, स्मोकिंग और एल्कोहल की वजह से हार्ट अटैक की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
इससे बचाव करना बेहद जरूरी हो गया है। दिल का दौरा एक खतरनाक कंडीशन है, जिसमें अधिकतर लोग जान गंवा देते हैं। हालांकि हार्ट अटैक के बाद अगर मरीज को तुरंत मेडिकल सहायता मिल जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। कार्डियोलॉजिस्ट से जानेंगे कि हार्ट अटैक के बाद लोगों को क्या करना चाहिए और किस तरह जान बचाई जा सकती है।
ग्रेटर नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग में एडिशनल डायरेक्टर डॉ. विवेक टंडन के अनुसार दिल का दौरा पड़ने के बाद पहले 60 मिनट के भीतर मरीज को अस्पताल पहुंचाने से उसकी जान बचाई जा सकती है। दिल का दौरा पड़ने के बाद के 60 मिनटों को ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। यह समय तेजी से इलाज शुरू करने के लिए महत्वपूर्ण है। हार्ट अटैक के बाद दिल की मांसपेशियां 80-90 मिनट के भीतर खून न मिलने के कारण डेड होना शुरू हो जाती हैं।
इस दौरान इलाज शुरू न होने पर अगले छह घंटों के भीतर दिल पूरी तरह डैमेज हो जाता है। इससे लोगों की मौत हो जाती है। दिल का दौरा पड़ने के बाद जितना जल्दी खून की सप्लाई बहाल की जाएगी, उतना कम नुकसान हार्ट और अन्य अंगों को होगा।
दिल का दौरा पड़ने के बाद इलाज के लिए मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए, लेकिन हार्ट अटैक के तुरंत बाद मरीज को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) दिया जाए, तो यह मरीज के लिए जीवित रहने की संभावना को दोगुना कर देता है।
फोर्टिस हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. विवेक शामा के मुताबिक कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) सबसे कॉमन हार्ट डिजीज में से एक है और इससे मौत का खतरा बहुत ज्यादा है। डायबिटीज के मरीजों को कोरोनरी आर्टरी डिजीज होने का अधिक खतरा होता है। देश में किए गए कुछ अध्ययनों के अनुसार भारत में प्रति एक लाख जनसंख्या पर 272 हृदय रोगी हैं।



