Friday, April 10, 2026
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डॉ. सिराजुद्दीन बाली की देखरेख में इस्लाह-ए-मुआशरा का प्रोग्राम आयोजित

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मुफ्ती आरिफ लुधियानवी ने किया अब्दुल्लाहपुर बस्ती के आम व खास से ख़िताब

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लुधियाना,20 अगस्त। पंजाब के मशहूर डॉक्टर और बाली हॉस्पिटल (नज़दीक बस अड्डा लुधियाना) के संस्थापक व मालिक डॉ. सिराजुद्दीन बाली एक अदीब-नवाज़ और उलमा-नवाज़ इंसान हैं। वे विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म से उम्मत को फ़ायदा पहुँचा रहे हैं। डॉ. सिराजुद्दीन बाली और मोहम्मद गुल बहार (सतजोत नगर) की पहल पर मस्जिद इक़बाल में इस्लाह-ए-मुआशरा का एक बड़ा और अहम प्रोग्राम आयोजित हुआ, जिसकी सदारत ख़ुद डॉ. सिराजुद्दीन बाली ने की।

प्रोग्राम की शुरुआत हाफ़िज़ शम्श आलम की तिलावत-ए-क़ुरान और हाफ़िज़ मोहम्मद ज़हीब की नात-ए-नबी से हुई। मेहमान-ए-ख़ास के तौर पर मोहम्मद इलियास, मोहम्मद अल्ताफ़, डॉ. मोहम्मद उमर और अल-फ़लाह इंतज़ामिया कमेटी के सभी सदस्य शामिल हुए। वहीं, हाफ़िज़ लुत्फ़ुर्रहमान (इमाम व ख़तीब मस्जिद इक़बाल) ने प्रोग्राम की निगरानी (अनाउंसर) के फ़र्ज़ अदा किए।

प्रोग्राम से ख़िताब करते हुए मुफ़्ती मोहम्मद आरिफ़ लुधियानवी (मुफ़्ती-ए-शहर लुधियाना, सदर जमीयत-ए-उलमा लुधियाना और कन्वीनर जमीयत-ए-उलमा हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़) ने कहा कि हमारे नबी क़यामत तक आने वाली इंसानियत के लिए नमूना और आदर्श हैं। उन्हीं से जुड़े रहने में दुनिया और आख़िरत की कामयाबी है। उन्होंने कहा कि नबी के जमाल-ए-जहान-आरा को देखने के लिए क़ुरान से बढ़कर कोई आईना नहीं है।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है कि हम क़ुरान, हदीस, शरीअत और सुन्नत का गहराई से मुताला करें और अच्छे अख़लाक़ व किरदार के ज़रिए मुल्क के भाईचारे और पूरी दुनिया के सामने इस्लाम और पैग़म्बर-ए-इस्लाम की सही तस्वीर पेश करें।

जमात-ए-दावत-ओ-तबलीग और जमीयत-ए-उलमा लुधियाना के कार्यकर्ताओं व ज़िम्मेदारों से ख़िताब करते हुए मुफ़्ती शहर ने कहा कि वक्त की सख़्त ज़रूरत है कि हम ज़माने और लोगों की मानसिकता, मिज़ाज और तरजीहात को समझकर अपने दीन और मिल्ली कामों को तर्तीब दें। नौजवानों की दीनी तालीम व तरबियत से हरगिज़ ग़ाफ़िल न हों, क्योंकि यही नौजवान हमारा मुस्तक़बिल हैं। अगर उनकी दीनदारी पुख़्ता रही तो आने वाली नस्लें भी दीन पर क़ायम रहेंगी। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी आने वाली नस्लों के ईमान और आमाल की परवाह नहीं करेंगे तो उनका दीन पर क़ायम रहना किसी बड़े चैलेंज से कम नहीं होगा। इसलिए हमें सिर्फ़ मस्जिद ही नहीं बल्कि अपने घरों के माहौल को भी दीनी रंग में ढालना होगा और बच्चों को दीनी और अस्री तालीम दोनों से आरासता करना होगा।

प्रोग्राम के आयोजक और मस्जिद इक़बाल की इंतज़ामिया कमेटी के सदर व बाली हॉस्पिटल के मालिक डॉ. सिराजुद्दीन बाली ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। नवेद असलम, मोहम्मद अल्ताफ़, मोहम्मद फ़ुरक़ान, मोहम्मद रफ़ी, मोहम्मद मज़ाहिर और अल-फ़लाह कमेटी के सदस्यों ने मेहमाननवाज़ी की ज़िम्मेदारी निभाई।

शुरका-ए-प्रोग्राम में क़ारी मोहम्मद इंतिज़ार (इमाम व ख़तीब मस्जिद अहमद, सतजोत नगर), मोहम्मद अब्सार (अमीर-ए-जमात), अफ़सर आलम, क़ारी मोहम्मद सज्जाद (इमाम व ख़तीब मदनी मस्जिद गुल चौक), मोहम्मद यासीन (पंजाबी बाग), मोहम्मद शुऐब (गुरुगोविंद सिंह नगर), मोहम्मद नसीम (रूप नगर), मोहम्मद खुर्शीद (सतजोत नगर), हाफ़िज़ नफ़ीस (रूप नगर) और मोहम्मद अमीन लुधियानवी आदि शामिल थे।

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