Sunday, April 19, 2026
No menu items!
Google search engine

मैं कलम हूँ , मैं आहत हूँ पत्रकारिता के नाम पर मेरा गला घोटा जा रहा मुझे बचा लो मैं कलम हूँ

Spread the News

मैं देश की आज़ादी से लेकर भारत का इतिहास लिखने वाली कलम: गलत लोगों के हाथ में चली गई मुझे बचा लो

नई दिल्ली। पत्रकारिता कलम बुद्धिजीवी के हाथ में रहे तो देश में विकास की क्रांति ला सकती है। वही कलम अगर गलत लोगों के हाथ में लग जाए तो देश में अलगाववाद भ्रष्टाचारी चरम पर पहुंच जाएगी। आज के समय में वही हो रहा है। यह बढ़ती हुई बेरोजगारी के कारण युवा पीढ़ी गलत दिशा की ओर भटक गई।

अपने मिशन से हटकर देश और समाज के लिए घातक हो रही है। यही पत्रकारिता अगर गलत रास्ते में भटक जाए तो देश विकास से विनाश की ओर आ जाता है। पत्रकारिता का इसमें बहुत बड़ा योगदान होता है। प्रदेश में न्यूज़ का वेब पोर्टल बनाकर उसकी ओट में भयादोहन और अवैध वसूली की घटनाओं में नवीन राज्य बनने के बाद तेजी से बढ़ी है। और लगातार बढ़ती जा रही है।

नौकरी न मिलने से हताश निराश अधिकतर स्वाभिमानी युवा अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर अथक मेहनत कर सम्मानजक जीवन जीते हैं। पर वहीं दूसरी ओर कुछ युवा बेरोज़गार अपनी अयोग्यता से रोज़गार न मिल पाने पर उदर पूर्ति के लिए वेब पोर्टल बना कर क्षुद्र स्वार्थों की थैली लिए रोड ठेकेदारों अधिकारियों के दरवाज़े दरवाज़े भटकते हुए भयादोहन में रम जाते हैं।

बरसाती मेंढक की तरह उग आए चन्द वेब पोर्टलों पर सरकार द्वारा कारगर रोक लगानी जरूरी है। इन पर रोक नहीं लगाने तथा चन्द न्यूज़ पोर्टलों को होली दीवाली के साथ साथ कुछ सरकारी विज्ञापन की सुविधा मिलने से इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्वतंत्र पत्रकारिता के नाम पर वेब पोर्टल के ये अवैध खिलाड़ी जो भी बोलेंगे सच बोलेंगे। स्वतंत्र बोलेंगे जैसे लुभावने स्लोगन देते हुए पेशे की ओट लेकर अवैध उगाही और ब्लैकमेलिंग के जरिए मोटी कमाई में व्यस्त हो जाते हैं ताकि उनके कुम्भकर्णी उदर की पूर्ति हो सके।

कुछ लोग समाज के जिम्मेदार नागरिक बनने से इतर आय का शार्टकट ज़रिया ढूंढने निकल पढ़ते हैं ताकि रातों रात लखपति बना जा सके ये पोर्टलधारी कण्टकपथ पर सरपट दौड़ते ये भूल जाते हैं कि इनके इस कृत्य से उन ईमानदार पत्रकारों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग जाती है। जो ईमानदार और निर्भीक पत्रकारिता करते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में यह जिले एवं प्रदेश की राजधानी सहित अन्य जगहों पर बहुतायत से देखने को मिल रहा है। हाल के वर्षों में ऐसे ही पत्रकार के भेष में 2 ब्लैकमेलरों को झोलाछाप डॉक्टर मैहर के विद्यालय के भोजन की झूठी खबर दिखाने के नाम पर उत्पीड़न करने के आरोप में जेल जाते जाते बचे थे। फिर भी अवैध क्रियाकलाप ऐसे कि थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं बल्कि बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है।

हाल ही में राजधानी में बेव पोर्टल का तमगा लिए कुक एक वसूलीबाज अधिकारियों के शासकीय कार्यों से पृथक निजी जीवन में फूहड़ और बेहू तांक झांक पर उतर आए है चंदा वसूली में असफल पत्रकार जिसका नाम एक राजनीतिक दल के नेता और पर्वत के नाम पर है। वह पुरुष ही नहीं महिला अधिकारियों के निजी जीवन पर तलाक जैसे घिनौने आरोप तक लगाने से नहीं हिचक रहे है। सच तो यह है कि वह पर्वत अर्थात गिरी तो नहीं है पर अपने हरकतों से अपने को पेशे से गिरा हुआ साबित करता जरूर दिख रहा है।

पत्रकार को बोलने की आजादी है वह स्वतंत्र लिख बोल सकता है पर स्वतंत्र बोलने के नाम पर समाज में फूहड़ता झूठ फरेब निर्लज्जता नहीं परोस सकता। अधिकतर वे बेरोज़गार जो सामाजिक जीवन में असफलता के पश्चात पोर्टल का संचालन करने लगे हैं उन्हें शायद मालूम नहीं पत्रकारिता मात्र एक पेशा नहीं पैशन है जुनून है। सच के नाम पर सत्ता सरकार से टकराने का जज्बा रखने वाले दिलेरों का शाही अंदाज है।

ये पत्रकारितापन जानने वाले इस तरह के हथकंडे अपनाते रहेंगे तो कभी नहीं समझ पाएंगे कि पत्रकारिता पेट भरने नाहक बदनाम करने झूठ परोसने का नाम नहीं एक धुन है। एक लगन है एक कंटक पथ है। जो समाज को सच से रुबरु करवाता है। कलम को ढाल बना कर नाजायज़ अर्थोपार्जन करना पत्रकारिता नहीं एक्सटॉर्शन है। मात्र कलम के आधार पर क्या इन पोर्टल वालों को इतनी स्वतंत्रता इतना अधिकार मिलना चाहिए कि वे जब जिसका चाहे उसकी निजता नागरिक अधिकारों का हनन कर सकें।

किसी पुरुष अधिकारी ,महिला अधिकारी राजनेता सार्वजनिक जीवन जीने वाले सभ्य शिष्ट सामाजिक परिवेश की किसी मशहूर शख्सियत का चरित्र हनन कर सके किसी के निजी जीवन में बेहूदा दखलअंदाजी किसी भी तरह से पत्रकारिता नहीं कही जा सकती। किसी की निजता के अधिकार का अतिलंघन कर उसे सभ्य समाज में चरित्र हनन कर दूषित मानसिकता और शुद्र स्वर्थों की पूर्ति के लिए समाज में परोसा जाना निंदनीय है।

यह न केवल नैतिकता के पतन की परकाष्ठा है। अपितु कलमकार की गिरी कलम की गिरी मानसिकता का घोतक है यह मानहानिकारक अपराध की श्रेणी में भी आता है। अलेखनीय है कि ये चन्द लोग ना ना प्रकार से कुछ अधिकारियों को चिन्हित करते हैं और फिर वसूली के खेल में व्यस्त हो जाते हैं। पहले पहल तीज त्योहारों पर चंदा रूपी भिक्षा मांगी जाती है। भिक्षा प्राप्ति में असमर्थ होने पर चरित्र हनन का घिनौना खेल शुरू हो जाता है। अधिकारियों से छोटी मोटी रकम मिल गई तो वाह वाह अन्यथा कलम और तमगा तो साथ है ही।

लिख डालेंगे वैसे भी निराधार खबरों को छापने पर प्रतिबंध अथवा कड़ा कानून तो है नहीं। तो इस तरह के लोग जो गिनती में कुछ एक से होंगे वे एक मिशन बना कर मनमाफिक स्वार्थपूर्ति न हो पाने का अपना निजी दर्द कलम के जरिये समाज को झूठी खबर के रूप में पेश करते हैं। ऐसे कलंकित बदनामशुदा कलमखोरों के लिए सभी को आगे आना होगा सम्मानीय वरिष्ठों को भी नए नए पैदा हुए इन ब्लैकमेलरों को पहचान कर नियंत्रित कर उन्हें पेशे का अर्थ समझाना होगा।

सरकार को भी कानून बना कर उस पर अमल करना बेहद जरूरी आवश्यकता बन गई है। और ऐसा कानून वर्तमान परिवेश को देखते हुए अपरिहार्य भी है। ताकि एक ईमानदार और पवित्र पेशा जिसे पत्रकारिता कहते हैं। चन्द बेजा लोगों की ओछी हरकतों से बदनाम न हो सके। दम तोड़ती पत्रकारित को बचाया जा सके झूठी खबर चलाने पर सरकार को कड़े दंड प्रत्यारोपित करने की महती आवश्यकता है।

जिसमें सम्बन्धित पोर्टलधारी का लाइसेंस निलंबित / रद्द करने जैसे कठोर नियम हो इन जैसे ब्लैकमेल की वजह से पत्रकारिता कलंकित दौर से गुजरने को विवश हो जाती है जिसका सर्वाधिक नुकसान ईमानदार पत्रकारों को होता है अगर इस बेहूदा हरकत पर भी लगाम नहीं लगाई गई तो यह दिन दूर नहीं कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अपनीयता खो देगा इन बिना रीढ़ के लोगों पर अंकुश लगाया जाना बेहद जरूरी है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments