Sunday, April 19, 2026
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हिंदू मुस्लिम हैँ भाई-भाई, आपस में लड़ाना छोड़ दो। बहन बेटी का चीरहरण, अस्मत उड़ाना छोड़ दो

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दिल को दुखाना छोड़ दो
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दिल को दुखाना छोड़ दो,
सुख को चुराना छोड़ दो।

करो कोई काम ना ऐसा,
जन को सताना छोड़ दो।

कोई सज्जन न हो आहत,
हक को दबाना छोड़ दो।

बहुत ही हो कत्ल ए आम,
दंगे निभाना छोड़ दो।

बड़ी मुश्किल से हैँ बसती,
बस्तियाँ जलाना छोड़ दो।

जान लो कीमत मानव की,
लहू को बहाना छोड़ दो।

हिंदू मुस्लिम हैँ भाई-भाई,
आपस में लड़ाना छोड़ दो।

बहन बेटी का चीरहरण,
अस्मत उड़ाना छोड़ दो।

होती हर मौत रिश्ते की,
भटका निशाना छोड़ दो।

मनसीरत रास ना आए,
आलाप पुराना छोड़ दो।
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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